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Synergy Need and Planning

व्यक्तित्व का‌ निखार, संगति पर विचार

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व्यक्तित्व का‌ निखार, संगति पर विचार

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Post Highlights

आज की तारीख में जहां हर किसी के पास टेक्नोलॉजी उपलब्ध है जिसमें कंप्यूटर स्मार्टफोन जैसे उपकरण शामिल हैं, इनके द्वारा लोग आज कई तरह के विषयों को देखते हैं, सुनते हैं या पढ़ते हैं। यह सभी मनुष्य की संगति का हिस्सा बन चुके हैं और कई तरह से इससे काफी प्रभावित भी होते हैं। यह सब संंगति व्यक्ति को अच्छे या बुरे बनने का आकार देते हैं। व्यक्ति से अच्छा जुड़ाव हमेशा दृष्टि का विस्तार करती है।

किसी मनुष्य के जीवन में उसके व्यक्तित्व की बहुत बड़ी भूमिका होती है। वो कैसे बोलता है, अपने विचार व्यक्त करता है या व्यवहार करता है यह सब उसके व्यक्तित्व पर निर्भर करती है। किसी भी व्यक्ति के व्यक्तित्व में उसकी संगति उसके ईद के इर्द-गिर्द रहने वाले लोगों का गहरा प्रभाव पड़ता है। अच्छी संगति में रहने से व्यक्तित्व का निखार होता है वही बुरी संगति जीवन पर बुरा प्रभाव डालती है। मनुष्य की संगति किसी भी प्रकार से हो सकती है चाहे वह किसी व्यक्ति के समक्ष रखकर हो या फिर आज की आधुनिकता में प्रौद्योगिकी उपकरणों के द्वारा हो। यह सभी उसके जीवन में योगदान देती हैं। इसलिए इस बात पर हमेशा विचार करते रहना चाहिए कि हमारी संगति कैसी है और उसका हमारे जीवन पर क्या प्रभाव पड़ सकता है।

व्यक्तित्व क्या है?

व्यक्तित्व विचारों, भावनाओं और व्यवहारों का विशिष्ट स्वरूप है जो किसी व्यक्ति को अद्वितीय बनाता है। यह माना जाता है कि व्यक्तित्व व्यक्ति के भीतर से उत्पन्न होता है और जीवन भर काफी सुसंगत रहता है। किसी व्यक्ति का व्यक्तित्व व्यवहार, दृष्टिकोण और राय से पता चलता है और अन्य लोगों के साथ बातचीत में सबसे स्पष्ट रूप से व्यक्त होता है। इसमें अंतर्निहित और अर्जित दोनों तरह की व्यवहारिक विशेषताएं शामिल हैं, जो एक व्यक्ति को दूसरे से अलग करती हैं। व्यक्ति का व्यक्तित्व केवल एक दिन से दूसरे दिन में नहीं बदलता है, वास्तव में यह शायद ही कभी बदलता है। यदि कुछ परिवर्तन होते हैं तो वे बहुत सीमित और धीमे होते हैं। यदि वे होते हैं तो वे आघात या जीवन बदलने वाले अनुभवों के कारण हो सकते हैं। लेकिन इन कारणों के अलावा मनुष्य की संगति का उसके व्यक्तित्व पर गहरा प्रभाव पड़ता है। 

संगति का असर

संघ ऐसे लोगों से बनते हैं, जो समान चुनौतियों और अवसरों को साझा करते हैं। व्यक्तित्व और संगति समान जड़ों से जुड़ी हुई है। मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है वह अकेला नही रह सकता। बचपन से ही एक दूसरे के साथ रहने, बैठने, उठने की इच्छा उत्पन्न हो जाती है। यह संगति अच्छी भी हो सकती है और बुरी भी। अच्छी संगति जीवन को सुखदाई बनाता है, वहीं बुरी संगति दुखदाई। मनुष्य जैसी संगति में रहता है उसका व्यक्तित्व वैसा ही हो‌ जाता है।‌ जिस प्रकार एक ही स्वाति बूंद केले के घर में पड़कर कपूर बन जाती है, सीप में पड़कर मोती बन जाती है और सांप के मुंह में पड़ जाए तो विश बन जाती है, ठीक उसी प्रकार मनुष्य जिस प्रकार की संगति में उठता बैठता है, उसका व्यक्तित्व उसी प्रकार का बन जाता है। वह उसकी तरह समान विचार रखता है और उसकी तरह सोचने भी लगता है। बड़े से बड़ा व्यक्ति भी किसी न किसी व्यक्ति के संगत से प्रभावित होता है। जीवन के प्रत्येक कदम‌ पर‌ हमें अलग-अलग तरह के लोग मिलते हैं जो हमें जीवन में आगे बढ़ने में मदद करते हैं। मनुष्य के जीवन में कई बार ऐसी चीजों की ज़रूरत होती है जो उसे दूसरे व्यक्ति के संगत के द्वारा ही मिल पाती हैं। 

संगति किस तरह जीवन को प्रभावित करती है?

आज की आधुनिक दुनिया में हर कोई एक दूसरे से ‌किसी‌ न किसी तरीके से जुड़ा हुआ है, जिनमें से व्यक्ति कई अन्य लोगों से प्रभावित भी होते हैं। लेकिन ऐसा ज़रूरी नहीं कि वे‌ वही लोग होते हैं जिनके साथ लोग सबसे ज्यादा वक्त बिताते हैं। मनुष्य के व्यक्तित्व पर प्रभाव डालने वाले सिर्फ वही लोग नहीं होते जो उनके इर्द-गिर्द होते हैं, बल्कि यह उनके अलावा भी हो सकते हैं। मनुष्य जो करता है या कहता है इसका प्रभाव न सिर्फ उन आस-पास रहने वाले लोगों पर होता है, बल्कि अन्य दूसरे लोग भी उससे प्रभावित होते हैं तथा न सिर्फ उन लोगों पर बल्कि उसके विपरीत उनका भी प्रभाव हम पर पड़ता है। यह प्रभाव फिर कैसा भी हो सकता है अच्छा या बुरा इसलिए इससे सतर्क होने की आवश्यकता है। ऐसा सिद्ध हुआ है कि आज की आधुनिक दुनिया में आधे से ज्यादा व्यक्ति अपने झूठे व्यक्तित्व ‌का‌ प्रदर्शन करते हैं।

अगर किसी व्यक्ति की संगत दूसरे व्यक्ति के जीवन में कोई सकारात्मक प्रभाव नहीं डालता है तो वह निश्चित रूप से जीवन के मूल्यों को घटा रहा है। इन्हीं मूल्यों का किसी भी व्यक्ति के जीवन में उसकी सफलता में बहुत बड़ा योगदान होता है। इसलिए लोग जैसा सुनते हैं, जिनसे प्रभावित होते हैं, जिनके साथ रहते हैं या जिनकी सलाह लेते हैं वह निश्चित रूप से किसी न किसी तरीके से उनके जीवन में असर डालते हैं। इसलिए ऐसा कहा जाता है कि वास्तव में हम कुछ लोगों के साथ सिर्फ समय बिताते हैं लेकिन कुछ लोगों के साथ हम अपने समय का निवेश करते हैं। उचित लोगों के साथ समय का निवेश ही सफलता की असली कुंजी है।‌ हमारे पास ऐसे कई सफल व्यक्तियों के उदाहरण हैं जिनकी कहानी और उनके विचार सुनकर लोग प्रभावित हो सकते हैं। अपने व्यक्तित्व को निखार सकते हैं और उनसे सीख सकते हैं। वास्तव में जीवन में सकारात्मक प्रभाव डालने वाले व्यक्ति का व्यक्तित्व अपनाने के लिए उसके जैसी मानसिकता, विचार प्रक्रिया को अपनाना चाहिए और कोई भी कार्य करने से पहले खुद से सवाल पूछना चाहिए कि यदि वे उस परिस्थिति में होते तो किस तरह की प्रतिक्रिया देते। इसी प्रकार से किसी सफल और अच्छी मानसिकता वाले व्यक्ति के गुणों को अपनाया जा सकता है।

संगति से व्यक्तित्व का निखार

आज की तारीख में जहां हर किसी के पास टेक्नोलॉजी उपलब्ध है जिसमें कंप्यूटर स्मार्टफोन जैसे उपकरण शामिल हैं, इनके द्वारा लोग आज कई तरह के विषयों को देखते हैं, सुनते हैं या पढ़ते हैं। यह सभी मनुष्य की संगति का हिस्सा बन चुके हैं और कई तरह से इससे काफी प्रभावित भी होते हैं। यह सब संंगति व्यक्ति को अच्छे या बुरे बनने का आकार देते हैं। व्यक्ति से अच्छा जुड़ाव हमेशा दृष्टि का विस्तार करती है। इसलिए इस बात पर विचार करना महत्वपूर्ण है कि हम किसके साथ समय बिता रहे हैं, कितना समय बिता रहे हैं और किन चीजों में बिता रहे हैं। इस बात पर विचार करना अति आवश्यक है अपने व्यक्तित्व को सही दिशा देने के लिए जो सिर्फ खुद किया जा सकता है।

किसी मनुष्य के जीवन में उसके व्यक्तित्व की बहुत बड़ी भूमिका होती है। वो कैसे बोलता है, अपने विचार व्यक्त करता है या व्यवहार करता है यह सब उसके व्यक्तित्व पर निर्भर करती है। किसी भी व्यक्ति के व्यक्तित्व में उसकी संगति उसके ईद के इर्द-गिर्द रहने वाले लोगों का गहरा प्रभाव पड़ता है। अच्छी संगति में रहने से व्यक्तित्व का निखार होता है वही बुरी संगति जीवन पर बुरा प्रभाव डालती है। मनुष्य की संगति किसी भी प्रकार से हो सकती है चाहे वह किसी व्यक्ति के समक्ष रखकर हो या फिर आज की आधुनिकता में प्रौद्योगिकी उपकरणों के द्वारा हो। यह सभी उसके जीवन में योगदान देती हैं। इसलिए इस बात पर हमेशा विचार करते रहना चाहिए कि हमारी संगति कैसी है और उसका हमारे जीवन पर क्या प्रभाव पड़ सकता है।

व्यक्तित्व क्या है?

व्यक्तित्व विचारों, भावनाओं और व्यवहारों का विशिष्ट स्वरूप है जो किसी व्यक्ति को अद्वितीय बनाता है। यह माना जाता है कि व्यक्तित्व व्यक्ति के भीतर से उत्पन्न होता है और जीवन भर काफी सुसंगत रहता है। किसी व्यक्ति का व्यक्तित्व व्यवहार, दृष्टिकोण और राय से पता चलता है और अन्य लोगों के साथ बातचीत में सबसे स्पष्ट रूप से व्यक्त होता है। इसमें अंतर्निहित और अर्जित दोनों तरह की व्यवहारिक विशेषताएं शामिल हैं, जो एक व्यक्ति को दूसरे से अलग करती हैं। व्यक्ति का व्यक्तित्व केवल एक दिन से दूसरे दिन में नहीं बदलता है, वास्तव में यह शायद ही कभी बदलता है। यदि कुछ परिवर्तन होते हैं तो वे बहुत सीमित और धीमे होते हैं। यदि वे होते हैं तो वे आघात या जीवन बदलने वाले अनुभवों के कारण हो सकते हैं। लेकिन इन कारणों के अलावा मनुष्य की संगति का उसके व्यक्तित्व पर गहरा प्रभाव पड़ता है। 

संगति का असर

संघ ऐसे लोगों से बनते हैं, जो समान चुनौतियों और अवसरों को साझा करते हैं। व्यक्तित्व और संगति समान जड़ों से जुड़ी हुई है। मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है वह अकेला नही रह सकता। बचपन से ही एक दूसरे के साथ रहने, बैठने, उठने की इच्छा उत्पन्न हो जाती है। यह संगति अच्छी भी हो सकती है और बुरी भी। अच्छी संगति जीवन को सुखदाई बनाता है, वहीं बुरी संगति दुखदाई। मनुष्य जैसी संगति में रहता है उसका व्यक्तित्व वैसा ही हो‌ जाता है।‌ जिस प्रकार एक ही स्वाति बूंद केले के घर में पड़कर कपूर बन जाती है, सीप में पड़कर मोती बन जाती है और सांप के मुंह में पड़ जाए तो विश बन जाती है, ठीक उसी प्रकार मनुष्य जिस प्रकार की संगति में उठता बैठता है, उसका व्यक्तित्व उसी प्रकार का बन जाता है। वह उसकी तरह समान विचार रखता है और उसकी तरह सोचने भी लगता है। बड़े से बड़ा व्यक्ति भी किसी न किसी व्यक्ति के संगत से प्रभावित होता है। जीवन के प्रत्येक कदम‌ पर‌ हमें अलग-अलग तरह के लोग मिलते हैं जो हमें जीवन में आगे बढ़ने में मदद करते हैं। मनुष्य के जीवन में कई बार ऐसी चीजों की ज़रूरत होती है जो उसे दूसरे व्यक्ति के संगत के द्वारा ही मिल पाती हैं। 

संगति किस तरह जीवन को प्रभावित करती है?

आज की आधुनिक दुनिया में हर कोई एक दूसरे से ‌किसी‌ न किसी तरीके से जुड़ा हुआ है, जिनमें से व्यक्ति कई अन्य लोगों से प्रभावित भी होते हैं। लेकिन ऐसा ज़रूरी नहीं कि वे‌ वही लोग होते हैं जिनके साथ लोग सबसे ज्यादा वक्त बिताते हैं। मनुष्य के व्यक्तित्व पर प्रभाव डालने वाले सिर्फ वही लोग नहीं होते जो उनके इर्द-गिर्द होते हैं, बल्कि यह उनके अलावा भी हो सकते हैं। मनुष्य जो करता है या कहता है इसका प्रभाव न सिर्फ उन आस-पास रहने वाले लोगों पर होता है, बल्कि अन्य दूसरे लोग भी उससे प्रभावित होते हैं तथा न सिर्फ उन लोगों पर बल्कि उसके विपरीत उनका भी प्रभाव हम पर पड़ता है। यह प्रभाव फिर कैसा भी हो सकता है अच्छा या बुरा इसलिए इससे सतर्क होने की आवश्यकता है। ऐसा सिद्ध हुआ है कि आज की आधुनिक दुनिया में आधे से ज्यादा व्यक्ति अपने झूठे व्यक्तित्व ‌का‌ प्रदर्शन करते हैं।

अगर किसी व्यक्ति की संगत दूसरे व्यक्ति के जीवन में कोई सकारात्मक प्रभाव नहीं डालता है तो वह निश्चित रूप से जीवन के मूल्यों को घटा रहा है। इन्हीं मूल्यों का किसी भी व्यक्ति के जीवन में उसकी सफलता में बहुत बड़ा योगदान होता है। इसलिए लोग जैसा सुनते हैं, जिनसे प्रभावित होते हैं, जिनके साथ रहते हैं या जिनकी सलाह लेते हैं वह निश्चित रूप से किसी न किसी तरीके से उनके जीवन में असर डालते हैं। इसलिए ऐसा कहा जाता है कि वास्तव में हम कुछ लोगों के साथ सिर्फ समय बिताते हैं लेकिन कुछ लोगों के साथ हम अपने समय का निवेश करते हैं। उचित लोगों के साथ समय का निवेश ही सफलता की असली कुंजी है।‌ हमारे पास ऐसे कई सफल व्यक्तियों के उदाहरण हैं जिनकी कहानी और उनके विचार सुनकर लोग प्रभावित हो सकते हैं। अपने व्यक्तित्व को निखार सकते हैं और उनसे सीख सकते हैं। वास्तव में जीवन में सकारात्मक प्रभाव डालने वाले व्यक्ति का व्यक्तित्व अपनाने के लिए उसके जैसी मानसिकता, विचार प्रक्रिया को अपनाना चाहिए और कोई भी कार्य करने से पहले खुद से सवाल पूछना चाहिए कि यदि वे उस परिस्थिति में होते तो किस तरह की प्रतिक्रिया देते। इसी प्रकार से किसी सफल और अच्छी मानसिकता वाले व्यक्ति के गुणों को अपनाया जा सकता है।

संगति से व्यक्तित्व का निखार

आज की तारीख में जहां हर किसी के पास टेक्नोलॉजी उपलब्ध है जिसमें कंप्यूटर स्मार्टफोन जैसे उपकरण शामिल हैं, इनके द्वारा लोग आज कई तरह के विषयों को देखते हैं, सुनते हैं या पढ़ते हैं। यह सभी मनुष्य की संगति का हिस्सा बन चुके हैं और कई तरह से इससे काफी प्रभावित भी होते हैं। यह सब संंगति व्यक्ति को अच्छे या बुरे बनने का आकार देते हैं। व्यक्ति से अच्छा जुड़ाव हमेशा दृष्टि का विस्तार करती है। इसलिए इस बात पर विचार करना महत्वपूर्ण है कि हम किसके साथ समय बिता रहे हैं, कितना समय बिता रहे हैं और किन चीजों में बिता रहे हैं। इस बात पर विचार करना अति आवश्यक है अपने व्यक्तित्व को सही दिशा देने के लिए जो सिर्फ खुद किया जा सकता है।