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अमृत जल कृषि: लागत कम, मुनाफा ज्यादा 

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अमृत जल कृषि: लागत कम, मुनाफा ज्यादा 

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Post Highlights

अमृत जल कृषि से किसानों को जागरुक कर फसल और मिट्टी दोनों की गुणवत्ता को बढ़ाया जा सकता है। इससे किसानों का महंगे रसायनों में खर्च होने वाला पैसा भी बचेगा। हालांकि छोटे किसानों को इससे जोड़ने के लिए सरकार को काफी मेहनत करनी पड़ेगी। 

भारत एक कृषि प्रधान देश है। भारत की कुल जनसंख्या के 58 प्रतिशत लोग आज भी अपनी आजीविका के लिए खेती पर निर्भर हैं। भारत का कृषि क्षेत्र काफी हद तक गांव और गांव के लोगों पर निर्भर है। इतनी बड़ी जनसंख्या कृषि पर निर्भर होने के बाद भी देश में कृषि क्षेत्र में काम करने वाले लोगों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। इसकी मुख्य वजह किसानों के बीच जानकारी और संसाधनों का अभाव है। किसानों के पास ना तो पर्याप्त संसाधन हैं और ना ही किसानों में कृषि के प्रति जागरुकता। इसका नतीजा यह है कि देश ने चिकित्सा से लेकर विज्ञान तक हर क्षेत्र में खूब तरक्की की, लेकिन कृषि क्षेत्र में आज तक कोई बड़ा बदलाव नहीं आया। इसलिए किसान आज भी खेती को बोझ समझते हैं। हमारे देश में डॉक्टर का बेटा डॉक्टर, वैज्ञानिक का बेटा वैज्ञानिक तो जरूर बनना चाहेगा, लेकिन उसी देश में किसान का बेटा कभी किसान नहीं बनना चाहेगा।

इस समस्या को दूर करने के लिए किसानों का जागरुक होना अत्यंत आवश्यक है। किसानों को खेती के नए-नए तरीकों को जानना होगा। अमृत जल कृषि भी इन्ही तरीकों में से एक है। अमृत जल कृषि के जरिए किसानों को अच्छी फसल पैदा करने के लिए महंगे-महंगे रसायनों का इस्तेमाल नहीं करना पड़ेगा। अमृत जल कृषि किसानों के लिए काफी उपयोगी साबित हो सकती है। इसके लिए किसानों को महंगे और हानिकारक रसायनों की जगह खेती में कृषि जल का इस्तेमाल करना होगा। कृषि जल की सबसे अच्छी बात यह है कि इसे घर पर ही बनाया जा सकता है, इसके लिए किसी बाहरी चीज की आवश्यकता नहीं होती।

अमृत जल बनाने के लिए एक किलो ताजा गाय का गोबर, एक लीटर गौमूत्र, 10 लीटर पानी और पचास ग्राम पुराने गुड़ की आवश्यकता पड़ती है। इन चार चीजों के अलावा इसमें केले, बरगद की मिट्टी, कटहल की कालियां आदि का इस्तेमाल भी किया जा सकता है। इसे बनाने के लिए गोबर, गौमूत्र, पानी और गुड़ को किसी बड़े टब या बाल्टी में डालकर हाथ से खूब अच्छे से मिला लें। इसके बाद इसे किसी डंडे की मदद से अच्छे से मिक्स कर लें। अब इस घोल को किसी चीज से तीन दिनों तक ढक कर रख दें। हर दिन इसे डंडे की मदद से अच्छे से मिक्स कर लें। तीन दिन बाद इस घोल को 100 लीटर पानी में मिलाकर खेतों और पेड़ों में डाला जा सकता है। इसे जरूरत के हिसाब से मिट्टी में डालें। इसकी सबसे बड़ी खासियत है कि यह पूर्ण रूप से प्राकृतिक है, और इससे पेड़ों या मिट्टी को कोई नुकसान नहीं पहुंचता। इसमें इतनी ताकत होती है कि यह बंजर भूमि को भी उपजाऊ बना सकता है। इसमें गौमूत्र पड़े होने के कारण किटाणु या जीवाणु मिट्टी या पेड़ के आस-पास भी नहीं भटकते। इसमें पड़ने वाली सभी सामग्री किसानों को आसानी से घर में ही उपलब्ध हो जाती है, इसलिए किसानों का महंगे-महंगे रसायनों पर होने वाला अतिरिक्त खर्च भी बचता है। इसके उपयोग से मिट्टी को कोई नुकसान नहीं होता और मिट्टी की गुणवत्ता भी बनी रहती है। कृषि जल का उपयोग उच्चतम गुणवत्ता वाली कंपोस्ट बनाने के लिए भी किया जा सकता है। कृषि जल भारतीय किसानों के लिए खासकर छोटे किसानों के लिए वरदान साबित हो सकती है। सूरजमुखी, गेंहू, सरसों, दलहन और तिलहन में अमृत जल का उपयोग चमत्कारिक फायदे देता है। कई जगहों के किसान इसके इस्तेमाल से वाकिफ भी हैं। किसानों में अमृत जल के प्रति जागरुकता कृषि क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलाव ला सकती है। किसानों में इसके प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए काफी बड़े स्तर पर काम किए जाने की जरूरत है।   

भारत एक कृषि प्रधान देश है। भारत की कुल जनसंख्या के 58 प्रतिशत लोग आज भी अपनी आजीविका के लिए खेती पर निर्भर हैं। भारत का कृषि क्षेत्र काफी हद तक गांव और गांव के लोगों पर निर्भर है। इतनी बड़ी जनसंख्या कृषि पर निर्भर होने के बाद भी देश में कृषि क्षेत्र में काम करने वाले लोगों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। इसकी मुख्य वजह किसानों के बीच जानकारी और संसाधनों का अभाव है। किसानों के पास ना तो पर्याप्त संसाधन हैं और ना ही किसानों में कृषि के प्रति जागरुकता। इसका नतीजा यह है कि देश ने चिकित्सा से लेकर विज्ञान तक हर क्षेत्र में खूब तरक्की की, लेकिन कृषि क्षेत्र में आज तक कोई बड़ा बदलाव नहीं आया। इसलिए किसान आज भी खेती को बोझ समझते हैं। हमारे देश में डॉक्टर का बेटा डॉक्टर, वैज्ञानिक का बेटा वैज्ञानिक तो जरूर बनना चाहेगा, लेकिन उसी देश में किसान का बेटा कभी किसान नहीं बनना चाहेगा।

इस समस्या को दूर करने के लिए किसानों का जागरुक होना अत्यंत आवश्यक है। किसानों को खेती के नए-नए तरीकों को जानना होगा। अमृत जल कृषि भी इन्ही तरीकों में से एक है। अमृत जल कृषि के जरिए किसानों को अच्छी फसल पैदा करने के लिए महंगे-महंगे रसायनों का इस्तेमाल नहीं करना पड़ेगा। अमृत जल कृषि किसानों के लिए काफी उपयोगी साबित हो सकती है। इसके लिए किसानों को महंगे और हानिकारक रसायनों की जगह खेती में कृषि जल का इस्तेमाल करना होगा। कृषि जल की सबसे अच्छी बात यह है कि इसे घर पर ही बनाया जा सकता है, इसके लिए किसी बाहरी चीज की आवश्यकता नहीं होती।

अमृत जल बनाने के लिए एक किलो ताजा गाय का गोबर, एक लीटर गौमूत्र, 10 लीटर पानी और पचास ग्राम पुराने गुड़ की आवश्यकता पड़ती है। इन चार चीजों के अलावा इसमें केले, बरगद की मिट्टी, कटहल की कालियां आदि का इस्तेमाल भी किया जा सकता है। इसे बनाने के लिए गोबर, गौमूत्र, पानी और गुड़ को किसी बड़े टब या बाल्टी में डालकर हाथ से खूब अच्छे से मिला लें। इसके बाद इसे किसी डंडे की मदद से अच्छे से मिक्स कर लें। अब इस घोल को किसी चीज से तीन दिनों तक ढक कर रख दें। हर दिन इसे डंडे की मदद से अच्छे से मिक्स कर लें। तीन दिन बाद इस घोल को 100 लीटर पानी में मिलाकर खेतों और पेड़ों में डाला जा सकता है। इसे जरूरत के हिसाब से मिट्टी में डालें। इसकी सबसे बड़ी खासियत है कि यह पूर्ण रूप से प्राकृतिक है, और इससे पेड़ों या मिट्टी को कोई नुकसान नहीं पहुंचता। इसमें इतनी ताकत होती है कि यह बंजर भूमि को भी उपजाऊ बना सकता है। इसमें गौमूत्र पड़े होने के कारण किटाणु या जीवाणु मिट्टी या पेड़ के आस-पास भी नहीं भटकते। इसमें पड़ने वाली सभी सामग्री किसानों को आसानी से घर में ही उपलब्ध हो जाती है, इसलिए किसानों का महंगे-महंगे रसायनों पर होने वाला अतिरिक्त खर्च भी बचता है। इसके उपयोग से मिट्टी को कोई नुकसान नहीं होता और मिट्टी की गुणवत्ता भी बनी रहती है। कृषि जल का उपयोग उच्चतम गुणवत्ता वाली कंपोस्ट बनाने के लिए भी किया जा सकता है। कृषि जल भारतीय किसानों के लिए खासकर छोटे किसानों के लिए वरदान साबित हो सकती है। सूरजमुखी, गेंहू, सरसों, दलहन और तिलहन में अमृत जल का उपयोग चमत्कारिक फायदे देता है। कई जगहों के किसान इसके इस्तेमाल से वाकिफ भी हैं। किसानों में अमृत जल के प्रति जागरुकता कृषि क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलाव ला सकती है। किसानों में इसके प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए काफी बड़े स्तर पर काम किए जाने की जरूरत है।   

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