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Sustainability Cultural Dimension

जन्माष्टमी का उत्सव, मथुरा में महोत्सव

Sustainability Cultural Dimension

जन्माष्टमी का उत्सव, मथुरा में महोत्सव

Festival-of-Janmashtami-Festival-in-Mathura

Post Highlights

भारत सभ्यता और आस्था की पावन धरती है। भारत कई धर्मों को एक धागे में पिरोये हुए हर रोज़ ताज़ी साँसे लेता है। भगवान श्रीकृष्ण के जन्मदिवस का नाम जन्माष्टमी क्यों पड़ा? इस भव्य पर्व को सम्पूर्ण भारत में तो मनाया ही जाता है परन्तु इस त्यौहार को भारत देश में उत्तर प्रदेश के मथुरा शहर में बहुत धूम धाम से मनाया जाता है आइये जानते हैं क्यों और कैसे ?

भारत एक महान देश है, जहाँ कितनी ही सभ्यताओं ने जन्म लिया और ख़त्म हुईं मगर प्रत्येक सभ्यता अपने पीछे हज़ारों लाखों पन्नों का इतिहास छोड़ जाती है। भारत में बहती हवाओं में भी तमाम बीती सभ्यताओं की सौंधी-सौंधी खुशबू आती है। यहाँ की प्राचीन इमारतें हमारे अतीत की बागदानी आज भी करती हुई महसूस होती हैं। यहाँ के लोगों में बहुचर्चित कहानियां, किस्से, गीत, कहावतें, मुहावरे और हज़ारों सालों की कहानी एक-एक शब्द,  एक-एक वाक्य में ज़ुबानी चलती प्रतीत होती हैं। 

भारत सभ्यता और आस्था की पावन धरती है। भारत कई धर्मों को एक धागे में पिरोये हुए हर रोज़ ताज़ी साँसे लेता है। विश्व के प्रचीनतम से प्राचीनतम साहित्य में भारत के साहित्य को आज भी प्राथमिकता दी जाती है। सनातन धर्म के दो महाकाव्य रामायण और महाभारत भारतीय सभ्यता की जीती जागती मिसाल हैं। महाभारत विश्व में पढ़ा जाने वाला महानतम महाकाव्य है। कई भाषाओँ में प्रकाशित महाभारत महाकाव्य में कौरवों और पांडवों के युद्ध के मध्य होती भगवान श्री कृष्ण और अर्जुन की वार्ता को श्री मदभागवत गीता में उल्लेखित किया गया है,  जिसमें देखा जाए तो प्रत्येक मनुष्य के जीवन जीने का सार है। श्री कृष्ण ने जो कहा है “ देखा जाए तो मनुष्य घूम-घूम कर वही सब कृत्य करता है।” हिन्दू धर्म में श्री कृष्ण को कई नामों से पुकारा जाता है। उनका जन्मदिन एक त्यौहार के रूप में मनाया जाता है, जिसको जन्माष्टमी के नाम से सम्बोधित करते हैं। आइये जानते हैं विस्तार से इस त्यौहार को और इस त्यौहार से जुड़ी बातों को। 

भगवान श्रीकृष्ण के जन्मदिवस का नाम जन्माष्टमी क्यों पड़ा? ऐसा माना जाता है कि भगवान श्रीकृष्ण का जन्म भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष अष्टमी की तिथि को हुआ था। इस कारण भादो कृष्ण पक्ष की अष्टमी को जन्माष्टमी के नाम से जाना जाता है। इस दिन को पूरे भारत में भव्य रूप से मनाया जाता है। इस दिन कृष्ण कन्हैया की मूर्तियों को नए-नए कपड़े पहनाये जाते हैं। मंदिर में और घरों में महिलाएं, रात भर ठाकुर जी के लिए जन्मदिन के गीत गाती हैं। लोग इस दिन व्रत भी रखते हैं। पूरे भारत में पर्व का माहौल होता है। लोग नाचते गातें हैं हुए ख़ुशी का वातावरण स्थापति करते हैं। ऐसा माना जाता है कि  भगवान श्रीकृष्ण का जन्म दुखों का नाश करने के लिए हुआ है। ईश्वर ने इसलिए अवतार लिया ताकि वह मनुष्य जाति को जीवन जीने का सन्देश दे सकें। इस भव्य पर्व को सम्पूर्ण भारत में तो मनाया ही जाता है परन्तु इस त्यौहार को भारत देश में उत्तर प्रदेश के मथुरा शहर में बहुत धूम धाम से मनाया जाता है आइये जानते हैं क्यों और कैसे ?

मथुरा नगरी और जन्माष्टमी पर्व

जहाँ भगवान श्री कृष्ण का नाम आता है, वहाँ मथुरा का नाम आना तो तय है, क्योंकि मथुरा भगवान श्री कृष्ण की जन्मभूमि हैं। यहाँ श्रीकृष्ण जी का भव्य प्राचीन मंदिर है, जिसको श्रीकृष्ण जन्मभूमि के नाम से सम्बोधित करते हैं। जन्मभूमि मंदिर में हर रोज़ हज़ारों श्रद्धालु आते हैं परन्तु जन्माष्टमी के दिन पूरा मथुरा सजाया जाता है। मथुरा में श्रीकृष्ण के मंदिरों की संख्या की कोई गिनती नहीं हैं और सारे के सारे मंदिरों को बहुत अच्छे से सजाया जाता है। मथुरा के आसपास के गांव जैसे गोकुल, बरसाना, वृन्दावन, बरसाना, आदि सब श्रीकृष्ण के रंग में डूबे हुए हैं। और जन्माष्टमी के दिन ये सब सजाये जाते हैं। ये त्यौहार मथुरा वासियों के लिए गौरव का भाव प्रकट कराता है क्योंकि बाल गोपाल श्री कृष्ण का जन्म वहां हुआ था। 

श्री कृष्ण जन्माष्टमी का त्यौहार हिन्दू धर्म की आस्था और भगवानश्री कृष्ण के प्रति प्रेम का अध्भुत प्रतीक है। इसलिए यह पूरे भारत में तथा विश्व में भी कई जगह मनाया जाने वाला त्यौहार है। आप भी मनाइये और लड्डू गोपाल को सजाइये और खुशियां बांटिए। 

कुछ पक्तियां याद आती हैं बाल गोपाल की जो इस प्रकार हैं इसको कई बेहतरीन गायकों के द्वारा प्रस्तुत भी किया गया है। 

आनंद उमंग भयो,

जय हो नन्द लाल की ।

नन्द के आनंद भयो,

जय कन्हिया लाल की ॥

बृज में आनंद भयो,

जय यशोदा लाल की ।

हाथी घोडा पालकी,

जय कन्हिया लाल की ॥

 

 

भारत एक महान देश है, जहाँ कितनी ही सभ्यताओं ने जन्म लिया और ख़त्म हुईं मगर प्रत्येक सभ्यता अपने पीछे हज़ारों लाखों पन्नों का इतिहास छोड़ जाती है। भारत में बहती हवाओं में भी तमाम बीती सभ्यताओं की सौंधी-सौंधी खुशबू आती है। यहाँ की प्राचीन इमारतें हमारे अतीत की बागदानी आज भी करती हुई महसूस होती हैं। यहाँ के लोगों में बहुचर्चित कहानियां, किस्से, गीत, कहावतें, मुहावरे और हज़ारों सालों की कहानी एक-एक शब्द,  एक-एक वाक्य में ज़ुबानी चलती प्रतीत होती हैं। 

भारत सभ्यता और आस्था की पावन धरती है। भारत कई धर्मों को एक धागे में पिरोये हुए हर रोज़ ताज़ी साँसे लेता है। विश्व के प्रचीनतम से प्राचीनतम साहित्य में भारत के साहित्य को आज भी प्राथमिकता दी जाती है। सनातन धर्म के दो महाकाव्य रामायण और महाभारत भारतीय सभ्यता की जीती जागती मिसाल हैं। महाभारत विश्व में पढ़ा जाने वाला महानतम महाकाव्य है। कई भाषाओँ में प्रकाशित महाभारत महाकाव्य में कौरवों और पांडवों के युद्ध के मध्य होती भगवान श्री कृष्ण और अर्जुन की वार्ता को श्री मदभागवत गीता में उल्लेखित किया गया है,  जिसमें देखा जाए तो प्रत्येक मनुष्य के जीवन जीने का सार है। श्री कृष्ण ने जो कहा है “ देखा जाए तो मनुष्य घूम-घूम कर वही सब कृत्य करता है।” हिन्दू धर्म में श्री कृष्ण को कई नामों से पुकारा जाता है। उनका जन्मदिन एक त्यौहार के रूप में मनाया जाता है, जिसको जन्माष्टमी के नाम से सम्बोधित करते हैं। आइये जानते हैं विस्तार से इस त्यौहार को और इस त्यौहार से जुड़ी बातों को। 

भगवान श्रीकृष्ण के जन्मदिवस का नाम जन्माष्टमी क्यों पड़ा? ऐसा माना जाता है कि भगवान श्रीकृष्ण का जन्म भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष अष्टमी की तिथि को हुआ था। इस कारण भादो कृष्ण पक्ष की अष्टमी को जन्माष्टमी के नाम से जाना जाता है। इस दिन को पूरे भारत में भव्य रूप से मनाया जाता है। इस दिन कृष्ण कन्हैया की मूर्तियों को नए-नए कपड़े पहनाये जाते हैं। मंदिर में और घरों में महिलाएं, रात भर ठाकुर जी के लिए जन्मदिन के गीत गाती हैं। लोग इस दिन व्रत भी रखते हैं। पूरे भारत में पर्व का माहौल होता है। लोग नाचते गातें हैं हुए ख़ुशी का वातावरण स्थापति करते हैं। ऐसा माना जाता है कि  भगवान श्रीकृष्ण का जन्म दुखों का नाश करने के लिए हुआ है। ईश्वर ने इसलिए अवतार लिया ताकि वह मनुष्य जाति को जीवन जीने का सन्देश दे सकें। इस भव्य पर्व को सम्पूर्ण भारत में तो मनाया ही जाता है परन्तु इस त्यौहार को भारत देश में उत्तर प्रदेश के मथुरा शहर में बहुत धूम धाम से मनाया जाता है आइये जानते हैं क्यों और कैसे ?

मथुरा नगरी और जन्माष्टमी पर्व

जहाँ भगवान श्री कृष्ण का नाम आता है, वहाँ मथुरा का नाम आना तो तय है, क्योंकि मथुरा भगवान श्री कृष्ण की जन्मभूमि हैं। यहाँ श्रीकृष्ण जी का भव्य प्राचीन मंदिर है, जिसको श्रीकृष्ण जन्मभूमि के नाम से सम्बोधित करते हैं। जन्मभूमि मंदिर में हर रोज़ हज़ारों श्रद्धालु आते हैं परन्तु जन्माष्टमी के दिन पूरा मथुरा सजाया जाता है। मथुरा में श्रीकृष्ण के मंदिरों की संख्या की कोई गिनती नहीं हैं और सारे के सारे मंदिरों को बहुत अच्छे से सजाया जाता है। मथुरा के आसपास के गांव जैसे गोकुल, बरसाना, वृन्दावन, बरसाना, आदि सब श्रीकृष्ण के रंग में डूबे हुए हैं। और जन्माष्टमी के दिन ये सब सजाये जाते हैं। ये त्यौहार मथुरा वासियों के लिए गौरव का भाव प्रकट कराता है क्योंकि बाल गोपाल श्री कृष्ण का जन्म वहां हुआ था। 

श्री कृष्ण जन्माष्टमी का त्यौहार हिन्दू धर्म की आस्था और भगवानश्री कृष्ण के प्रति प्रेम का अध्भुत प्रतीक है। इसलिए यह पूरे भारत में तथा विश्व में भी कई जगह मनाया जाने वाला त्यौहार है। आप भी मनाइये और लड्डू गोपाल को सजाइये और खुशियां बांटिए। 

कुछ पक्तियां याद आती हैं बाल गोपाल की जो इस प्रकार हैं इसको कई बेहतरीन गायकों के द्वारा प्रस्तुत भी किया गया है। 

आनंद उमंग भयो,

जय हो नन्द लाल की ।

नन्द के आनंद भयो,

जय कन्हिया लाल की ॥

बृज में आनंद भयो,

जय यशोदा लाल की ।

हाथी घोडा पालकी,

जय कन्हिया लाल की ॥