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Synergy Mindset

क्या बेरहम और स्वार्थी होते हैं एक भाव

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क्या बेरहम और स्वार्थी होते हैं एक भाव

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Post Highlights

एक ही भाषा को बोलने और लिखने में दो अलग-अलग तरीके प्रयोग किये जाते हैं। कभी-कभी हम इस बात में भी भ्रमित हो जाते हैं कि, दो शब्दों का एक ही अर्थ है या अलग। यह अधूरा ज्ञान कई बार हमसे गलत शब्द बुलवा देता है। इसी प्रकार हम क्रूर और स्वार्थी शब्द में भी बहुत सशंकित होते हैं। हमें लगता है कि ये दोनों ही एक अर्थ वाले शब्द हैं। प्रत्येक व्यक्ति को इन महीन अंतरों के बारे में बोध होना चाहिए। 

भाषा के बिना मनुष्य संचार नहीं कर पाता है। एक ही भाषा को बोलने और लिखने में दो अलग-अलग तरीके प्रयोग किये जाते हैं। कभी-कभी हम इस बात को लेकर भी भ्रमित हो जाते हैं, कि दो शब्दों का एक ही अर्थ है या अलग। यह अधूरा ज्ञान कई बार हमसे गलत शब्द बुलवा देता है और सामने वाला व्यक्ति यदि उसके अर्थ से अवगत हो तो वह उसका गलत मतलब निकाल सकता है। यह अब आम बात है, हम शब्दों का बोध न होने के कारण इन शब्दों को सहजता से इस्तेमाल कर रहे हैं। अब तो ये शब्द इस तरह से इतने अधिक उपयोग होने लगे हैं कि हम उसे ही सही मानने लगे हैं। इसी प्रकार हम क्रूर और स्वार्थी शब्द में भी बहुत सशंकित होते हैं। हमें लगता है कि ये दोनों ही एक अर्थ वाले शब्द हैं। हम बड़ी निर्भिकता से इसका उपयोग करते हैं और कई बार इससे हमें परेशानी भी झेलनी पड़ती है। हालांकि यह दोनों शब्द ही नकारात्मक भावना को प्रदर्शित करते हैं, परन्तु इन दोनों के अर्थ में बहुत ही अंतर है। प्रत्येक व्यक्ति को इन महीन अंतरों के बारे में बोध होना चाहिए। 

क्रूर और स्वार्थी पूर्ण रूप से दो अलग शब्द हैं, जिनका अर्थ अलग-अलग होता है। एक यदि पूरब को इंगित कर रहा है तो दूसरा पश्चिम को। इन दोनों में नकारात्मकता का भाव अवश्य होता है, परन्तु इनकी प्राथमिकताएं अलग होती हैं। दोनों अपने लाभ के बारे में सोचते हैं परन्तु अलग-अलग परिपेक्ष में।

क्रूर व्यक्ति दयाहीन होता है, उसमें दूसरों के प्रति कोई उदार भावना नहीं होती है। उसे किसी के भी कष्ट से कोई प्रभाव नहीं पड़ता है। वह पहाड़ के उस पत्थर की भांति होता है, जिसे सामने की समतल धरती पर हो रही क्रिया से कोई प्रभाव नहीं पड़ता है, वह हर परिस्थिति में अपने व्यवहार को जटिल रखेगा। यह बात तो हम सबने ही कहीं न कहीं अवश्य सुनी होगी कि वह व्यक्ति कितना क्रूर था, उसे थोड़ी सी भी दया नहीं आई।

वहीं दूसरी तरफ स्वार्थी भाव उस व्यक्ति का व्यवहार होता है, जो केवल अपने फ़ायदे के बारे में ही सोचता है। वह हर परिस्थिति में यह कोशिश करता है कि सिर्फ उसका फ़ायदा ही हो। अपने फ़ायदे के लिए वह दूसरों का नुक़सान होगा इस बारे में तनिक भी विचार नहीं करता है। वह कहावत तो सुनी ही होगी हम लोगों ने कि स्वार्थी व्यक्ति अपने 100 रूपए के फ़ायदे के लिए सामने वाले का लाखों का भी नुकसान कर सकता है।

बेरहम तथा मतलबी होना दो अलग चीज़ें होती हैं। उदाहरण के तौर क्रूर व्यक्ति के अंदर इतनी मानसिक क्षमता होती है कि वह दूसरों की जान भी ले सकता है, जबकि स्वार्थी व्यक्ति ऐसा नहीं करता है। क्रूर व्यक्ति अपना नुकसान करके दूसरे का फ़ायदा कर सकता है। वहीं स्वार्थी व्यक्ति ऐसा नहीं करता है। स्वार्थी व्यक्ति दूसरों के प्रति हीन भावना नहीं रखता है। वह अपने लाभ के लिए किसी की जान नहीं ले सकता है। 

हमें शब्दों के भाव में अंतर पता होना चाहिए। यह हमारे ज्ञान के लिए भी आवश्यक है और दूसरों को इंगित करने के लिए भी।

भाषा के बिना मनुष्य संचार नहीं कर पाता है। एक ही भाषा को बोलने और लिखने में दो अलग-अलग तरीके प्रयोग किये जाते हैं। कभी-कभी हम इस बात को लेकर भी भ्रमित हो जाते हैं, कि दो शब्दों का एक ही अर्थ है या अलग। यह अधूरा ज्ञान कई बार हमसे गलत शब्द बुलवा देता है और सामने वाला व्यक्ति यदि उसके अर्थ से अवगत हो तो वह उसका गलत मतलब निकाल सकता है। यह अब आम बात है, हम शब्दों का बोध न होने के कारण इन शब्दों को सहजता से इस्तेमाल कर रहे हैं। अब तो ये शब्द इस तरह से इतने अधिक उपयोग होने लगे हैं कि हम उसे ही सही मानने लगे हैं। इसी प्रकार हम क्रूर और स्वार्थी शब्द में भी बहुत सशंकित होते हैं। हमें लगता है कि ये दोनों ही एक अर्थ वाले शब्द हैं। हम बड़ी निर्भिकता से इसका उपयोग करते हैं और कई बार इससे हमें परेशानी भी झेलनी पड़ती है। हालांकि यह दोनों शब्द ही नकारात्मक भावना को प्रदर्शित करते हैं, परन्तु इन दोनों के अर्थ में बहुत ही अंतर है। प्रत्येक व्यक्ति को इन महीन अंतरों के बारे में बोध होना चाहिए। 

क्रूर और स्वार्थी पूर्ण रूप से दो अलग शब्द हैं, जिनका अर्थ अलग-अलग होता है। एक यदि पूरब को इंगित कर रहा है तो दूसरा पश्चिम को। इन दोनों में नकारात्मकता का भाव अवश्य होता है, परन्तु इनकी प्राथमिकताएं अलग होती हैं। दोनों अपने लाभ के बारे में सोचते हैं परन्तु अलग-अलग परिपेक्ष में।

क्रूर व्यक्ति दयाहीन होता है, उसमें दूसरों के प्रति कोई उदार भावना नहीं होती है। उसे किसी के भी कष्ट से कोई प्रभाव नहीं पड़ता है। वह पहाड़ के उस पत्थर की भांति होता है, जिसे सामने की समतल धरती पर हो रही क्रिया से कोई प्रभाव नहीं पड़ता है, वह हर परिस्थिति में अपने व्यवहार को जटिल रखेगा। यह बात तो हम सबने ही कहीं न कहीं अवश्य सुनी होगी कि वह व्यक्ति कितना क्रूर था, उसे थोड़ी सी भी दया नहीं आई।

वहीं दूसरी तरफ स्वार्थी भाव उस व्यक्ति का व्यवहार होता है, जो केवल अपने फ़ायदे के बारे में ही सोचता है। वह हर परिस्थिति में यह कोशिश करता है कि सिर्फ उसका फ़ायदा ही हो। अपने फ़ायदे के लिए वह दूसरों का नुक़सान होगा इस बारे में तनिक भी विचार नहीं करता है। वह कहावत तो सुनी ही होगी हम लोगों ने कि स्वार्थी व्यक्ति अपने 100 रूपए के फ़ायदे के लिए सामने वाले का लाखों का भी नुकसान कर सकता है।

बेरहम तथा मतलबी होना दो अलग चीज़ें होती हैं। उदाहरण के तौर क्रूर व्यक्ति के अंदर इतनी मानसिक क्षमता होती है कि वह दूसरों की जान भी ले सकता है, जबकि स्वार्थी व्यक्ति ऐसा नहीं करता है। क्रूर व्यक्ति अपना नुकसान करके दूसरे का फ़ायदा कर सकता है। वहीं स्वार्थी व्यक्ति ऐसा नहीं करता है। स्वार्थी व्यक्ति दूसरों के प्रति हीन भावना नहीं रखता है। वह अपने लाभ के लिए किसी की जान नहीं ले सकता है। 

हमें शब्दों के भाव में अंतर पता होना चाहिए। यह हमारे ज्ञान के लिए भी आवश्यक है और दूसरों को इंगित करने के लिए भी।