facebook-pixel
Featured Advertisement
Think With Niche
Sustainability Social Justice and Biodiversity

बच्चों को स्थिरता की ओर ले जाने के तरीके

Sustainability Social Justice and Biodiversity

बच्चों को स्थिरता की ओर ले जाने के तरीके

ways-to-lead-children-to-sustainability

Post Highlights

हम अपने ग्रह के संसाधनों को रातोंरात नया नहीं कर सकते हैं, लेकिन यदि हम में से प्रत्येक अपना योगदान देता है, तो हम वर्तमान स्थिति को सुधारने में मदद कर सकते हैं। बच्चों को स्थायी जीवन के बारे में पढ़ाने से न केवल वर्तमान स्थिति को लाभ होता है, बल्कि इसका अर्थ यह भी है कि हम अपने बच्चों के लिए एक स्वस्थ भविष्य बनाने में मदद करते हैं। बच्चे वहीं से आगे बढ़ेंगे जहां हमने छोड़ा था, इसलिए उन्हें टिकाऊ जीवन की पहुंच के बारे में शिक्षित करना आवश्यक है‌‌।

हम एक ऐसी दुनिया में रहते हैं जो तेजी से बदल रही है और भविष्य में हमारे छात्रों को उनके कार्यस्थल में जिन चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा, वे उन समस्याओं पर आधारित होंगी जिन्हें हमने अभी तक पहचाना भी नहीं है। जैसा कि हम जानते हैं कि पृथ्वी पर हमारे लिए सीमित संसाधन उपलब्ध हैं जैसे कि पेड़, जल, वन, मिट्टी इत्यादि। जो मानव गतिविधियों के द्वारा खत्म होते जा रहे हैं। इसलिए इन्हें बचाने की जरूरत है, जिससे आने वाली पीढ़ी इन संसाधनों से वंचित न रह जाए। इसके लिए जरूरत है कि हम अपने ‌साथ-साथ बच्चों को भी बचपन से ही सतत शिक्षा प्रदान करें। जैसे कि उत्पादों के रीसाइक्लिंग और रीयूज़ का ज्ञान, संसाधनों का सीमित उपयोग आदि कदम हैं, जो उन्हें घरों और स्कूलों में सिखाए जा सकते हैं। जिससे इन संसाधनों का उपयोग आने वाली पीढ़ी भी कर‌ सके। भविष्य पर एक नज़र रखने की जरूरत है और दूसरी यह सुनिश्चित करने की है कि हम युवा पीढ़ी को एक मजबूत आधारभूत कौशल दे रहे हैं।

बच्चों में सतत विकास की मानसिकता

बच्चे सतत विकास के सभी आयामों का आधार होते हैं। उन्हें फलने-फूलने, अपनी पूरी क्षमता से विकसित होने और एक स्थायी दुनिया में रहने का अधिकार है। अगली पीढ़ी समाज में कई प्रभावशाली रोल मॉडल से घिरी हुई है, जैसे माता-पिता, भाई-बहन, शिक्षक, दोस्त और यहां तक ​​की टेलीविजन के पात्र भी। उनका सीखना दूसरों द्वारा स्पष्ट रूप से पढ़ाए जाने, प्रत्यक्ष अवलोकन के माध्यम से, गतिविधियों में भागीदारी के माध्यम से और उनसे जानकारी साझा करने के माध्यम से होता है। वे जो देखते हैं सुनते हैं अथवा जिस माहौल में रहते हैं, वही सीखते हैं। बचपन की शिक्षा में, घर की शिक्षा और स्कूलों की शिक्षा, पालन-पोषण का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। अगली पीढ़ी को शिक्षित करना चाहिए ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि सतत विकास बच्चों के लिए प्राथमिकता बन जाए। 

सतत शिक्षा शिक्षकों और बच्चों को सक्रिय भागीदार बनने और सामाजिक परिवर्तन लाने में सक्षम बनाती है। दिए गए कुछ ‌सुझावों को‌ शामिल करके बच्चों को सतत‌ शिक्षा की‌‌ ओर प्रेरित किया जा सकता है।

1.  डिस्पोजेबल से बेहतर रीयूजे़बल

हर चीज़ की शुरुआत सबसे पहले घर से होती है। इसलिए यदि बच्चों को पर्यावरण के अनुकूल जीवन प्रथाओं का ‌ज्ञान हो तो सबसे पहले स्वयं घर वालों को इसे अपनाने की आवश्यकता है। प्लास्टिक वाले उत्पादों के बजाय पुन: प्रयोज्य (reusable) उत्पादों का विकल्प चुनना उचित है जैसे कपड़े के नैपकिन, व्यंजन, मग और शॉपिंग बैग इत्यादि। बच्चों को भी यह समझाना चाहिए कि प्लास्टिक, प्रकृति को कितना नुकसान पहुंचाती है। जब घरेलू सामानों की बात आती है, तो उन उत्पादों को चुनना हमेशा अच्छा होता है जिनमें बहुत अधिक पैकेजिंग नहीं होती है। अपने बच्चों को समझाना चाहिए कि जब कचरा बटोरने वाला इसे ले जाता है तो कचरे का क्या होता है। 

2. संसाधनों का कम से कम उपयोग

संसाधनों की अत्यधिक खपत हर दिन हमारे ग्रह के लिए खतरा बनती है इसलिए बच्चों को यह शिक्षित करना आवश्यक है कि इसे कम करने के लिए क्या किया जा सकता है। कमरे से बाहर निकलते‌ समय लाइट बंद करने के लिए‌‌ बच्चों को प्रोत्साहित करना चाहिए। एलईडी लाइटिंग के फायदों को बताना चाहिए कि वे कैसे अधिक ऊर्जा बचाते हैं और नियमित बल्बों की तुलना में अधिक समय तक चलते हैं। उपयोग किए जाने वाले पानी की मात्रा को कम करना एक और महत्वपूर्ण कदम है क्योंकि यह ताजे पानी की आपूर्ति को बनाए रखने में मदद करता है, जो पहले से ही गंभीर स्थिति में हैं। बच्चों को कम पानी को इस्तेमाल करने के लिए प्रोत्साहित करना कुछ सकारात्मक कदम हो सकते‌ हैं।

3. रीसाइक्लिंग के लिए प्रोत्साहन

बच्चों को प्रेरित करने के लिए कचरे की छंटाई की जा सकती है, तो क्यों न रीसाइक्लिंग को एक मजेदार पारिवारिक अनुभव में बदला जाए? घर में हर प्रकार के कचरे के लिए अलग-अलग डिब्बे बनाकर बच्चों को उसी के अनुसार कचरे को छाँटने को देना चाहिए। इसके अतिरिक्त, उन्हें कूड़ेदान के नकारात्मक प्रभाव और कूड़ेदान के लिए हमेशा डिब्बे का उपयोग करने के तरीके के बारे में सिखाना उनके लिए प्रभावी हो सकता है। उनके लिए "हरित" जीवन को प्रोत्साहित करने वाली स्थानीय पहलों में शामिल होना एक अच्छा विचार हो‌ सकता है। बच्चों को ज्यादा से ज्यादा रीसाइक्लिंग के बारे में जानने के लिए प्रोत्साहित करना चाहिए।

4. रचनात्मक होना

घर में जिन पुरानी चीजों की आवश्यकता नहीं होती, उन्हें फेंकने के बजाय, बच्चों को उनकी रचनात्मकता को व्यक्त करने की अनुमति देकर उन्हें एक नए उपयोग में लाया जा सकता है। पुराने प्लास्टिक के कंटेनर और कार्डबोर्ड को नए आइटम, जैसे कि ज्वेलरी बॉक्स में बदलना या फिर घर‌ की साज-सज्जा के लिए कोई वस्तु बनाना इत्यादि कई ऐसी चीजें हैं, जिससे वे अपनी रचनात्मकता दिखा सकते हैं। स्कूल के नाटकों या पार्टियों के लिए पोशाक बनाने के लिए पुराने कपड़ों का भी उपयोग उत्तम है।

5. वृक्षारोपण ‌और भूमि संरक्षण

बच्चों को पेड़-पौधों के महत्त्व का‌ज्ञान कराना आवश्यक है। उन्हें वृक्षारोपण के लिए प्रोत्साहित करना चाहिए। साथ ही बच्चों को ‌मिट्टी‌ को ‌दूषित‌ करने वाले पदार्थों का उपयोग ‌कम‌ से कम करने की प्रेरणा देनी चाहिए जैसे कि प्लास्टिक। इन‌ पदार्थों को मिट्टी में फेंकने के ‌बजाय उनका‌ रीयूज‌ करने की जानकारी देना‌ श्रेष्ठ है।

हम एक ऐसी दुनिया में रहते हैं जो तेजी से बदल रही है और भविष्य में हमारे छात्रों को उनके कार्यस्थल में जिन चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा, वे उन समस्याओं पर आधारित होंगी जिन्हें हमने अभी तक पहचाना भी नहीं है। जैसा कि हम जानते हैं कि पृथ्वी पर हमारे लिए सीमित संसाधन उपलब्ध हैं जैसे कि पेड़, जल, वन, मिट्टी इत्यादि। जो मानव गतिविधियों के द्वारा खत्म होते जा रहे हैं। इसलिए इन्हें बचाने की जरूरत है, जिससे आने वाली पीढ़ी इन संसाधनों से वंचित न रह जाए। इसके लिए जरूरत है कि हम अपने ‌साथ-साथ बच्चों को भी बचपन से ही सतत शिक्षा प्रदान करें। जैसे कि उत्पादों के रीसाइक्लिंग और रीयूज़ का ज्ञान, संसाधनों का सीमित उपयोग आदि कदम हैं, जो उन्हें घरों और स्कूलों में सिखाए जा सकते हैं। जिससे इन संसाधनों का उपयोग आने वाली पीढ़ी भी कर‌ सके। भविष्य पर एक नज़र रखने की जरूरत है और दूसरी यह सुनिश्चित करने की है कि हम युवा पीढ़ी को एक मजबूत आधारभूत कौशल दे रहे हैं।

बच्चों में सतत विकास की मानसिकता

बच्चे सतत विकास के सभी आयामों का आधार होते हैं। उन्हें फलने-फूलने, अपनी पूरी क्षमता से विकसित होने और एक स्थायी दुनिया में रहने का अधिकार है। अगली पीढ़ी समाज में कई प्रभावशाली रोल मॉडल से घिरी हुई है, जैसे माता-पिता, भाई-बहन, शिक्षक, दोस्त और यहां तक ​​की टेलीविजन के पात्र भी। उनका सीखना दूसरों द्वारा स्पष्ट रूप से पढ़ाए जाने, प्रत्यक्ष अवलोकन के माध्यम से, गतिविधियों में भागीदारी के माध्यम से और उनसे जानकारी साझा करने के माध्यम से होता है। वे जो देखते हैं सुनते हैं अथवा जिस माहौल में रहते हैं, वही सीखते हैं। बचपन की शिक्षा में, घर की शिक्षा और स्कूलों की शिक्षा, पालन-पोषण का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। अगली पीढ़ी को शिक्षित करना चाहिए ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि सतत विकास बच्चों के लिए प्राथमिकता बन जाए। 

सतत शिक्षा शिक्षकों और बच्चों को सक्रिय भागीदार बनने और सामाजिक परिवर्तन लाने में सक्षम बनाती है। दिए गए कुछ ‌सुझावों को‌ शामिल करके बच्चों को सतत‌ शिक्षा की‌‌ ओर प्रेरित किया जा सकता है।

1.  डिस्पोजेबल से बेहतर रीयूजे़बल

हर चीज़ की शुरुआत सबसे पहले घर से होती है। इसलिए यदि बच्चों को पर्यावरण के अनुकूल जीवन प्रथाओं का ‌ज्ञान हो तो सबसे पहले स्वयं घर वालों को इसे अपनाने की आवश्यकता है। प्लास्टिक वाले उत्पादों के बजाय पुन: प्रयोज्य (reusable) उत्पादों का विकल्प चुनना उचित है जैसे कपड़े के नैपकिन, व्यंजन, मग और शॉपिंग बैग इत्यादि। बच्चों को भी यह समझाना चाहिए कि प्लास्टिक, प्रकृति को कितना नुकसान पहुंचाती है। जब घरेलू सामानों की बात आती है, तो उन उत्पादों को चुनना हमेशा अच्छा होता है जिनमें बहुत अधिक पैकेजिंग नहीं होती है। अपने बच्चों को समझाना चाहिए कि जब कचरा बटोरने वाला इसे ले जाता है तो कचरे का क्या होता है। 

2. संसाधनों का कम से कम उपयोग

संसाधनों की अत्यधिक खपत हर दिन हमारे ग्रह के लिए खतरा बनती है इसलिए बच्चों को यह शिक्षित करना आवश्यक है कि इसे कम करने के लिए क्या किया जा सकता है। कमरे से बाहर निकलते‌ समय लाइट बंद करने के लिए‌‌ बच्चों को प्रोत्साहित करना चाहिए। एलईडी लाइटिंग के फायदों को बताना चाहिए कि वे कैसे अधिक ऊर्जा बचाते हैं और नियमित बल्बों की तुलना में अधिक समय तक चलते हैं। उपयोग किए जाने वाले पानी की मात्रा को कम करना एक और महत्वपूर्ण कदम है क्योंकि यह ताजे पानी की आपूर्ति को बनाए रखने में मदद करता है, जो पहले से ही गंभीर स्थिति में हैं। बच्चों को कम पानी को इस्तेमाल करने के लिए प्रोत्साहित करना कुछ सकारात्मक कदम हो सकते‌ हैं।

3. रीसाइक्लिंग के लिए प्रोत्साहन

बच्चों को प्रेरित करने के लिए कचरे की छंटाई की जा सकती है, तो क्यों न रीसाइक्लिंग को एक मजेदार पारिवारिक अनुभव में बदला जाए? घर में हर प्रकार के कचरे के लिए अलग-अलग डिब्बे बनाकर बच्चों को उसी के अनुसार कचरे को छाँटने को देना चाहिए। इसके अतिरिक्त, उन्हें कूड़ेदान के नकारात्मक प्रभाव और कूड़ेदान के लिए हमेशा डिब्बे का उपयोग करने के तरीके के बारे में सिखाना उनके लिए प्रभावी हो सकता है। उनके लिए "हरित" जीवन को प्रोत्साहित करने वाली स्थानीय पहलों में शामिल होना एक अच्छा विचार हो‌ सकता है। बच्चों को ज्यादा से ज्यादा रीसाइक्लिंग के बारे में जानने के लिए प्रोत्साहित करना चाहिए।

4. रचनात्मक होना

घर में जिन पुरानी चीजों की आवश्यकता नहीं होती, उन्हें फेंकने के बजाय, बच्चों को उनकी रचनात्मकता को व्यक्त करने की अनुमति देकर उन्हें एक नए उपयोग में लाया जा सकता है। पुराने प्लास्टिक के कंटेनर और कार्डबोर्ड को नए आइटम, जैसे कि ज्वेलरी बॉक्स में बदलना या फिर घर‌ की साज-सज्जा के लिए कोई वस्तु बनाना इत्यादि कई ऐसी चीजें हैं, जिससे वे अपनी रचनात्मकता दिखा सकते हैं। स्कूल के नाटकों या पार्टियों के लिए पोशाक बनाने के लिए पुराने कपड़ों का भी उपयोग उत्तम है।

5. वृक्षारोपण ‌और भूमि संरक्षण

बच्चों को पेड़-पौधों के महत्त्व का‌ज्ञान कराना आवश्यक है। उन्हें वृक्षारोपण के लिए प्रोत्साहित करना चाहिए। साथ ही बच्चों को ‌मिट्टी‌ को ‌दूषित‌ करने वाले पदार्थों का उपयोग ‌कम‌ से कम करने की प्रेरणा देनी चाहिए जैसे कि प्लास्टिक। इन‌ पदार्थों को मिट्टी में फेंकने के ‌बजाय उनका‌ रीयूज‌ करने की जानकारी देना‌ श्रेष्ठ है।