facebook-pixel
Featured Advertisement
Think With Niche
Success Motivation

एक बेजोड़ व्यक्तित्व :डॉ भीमराव अंबेडकर

Success Motivation

एक बेजोड़ व्यक्तित्व :डॉ भीमराव अंबेडकर

Post Highlights

महान व्यक्ति वह व्यक्ति होते हैं जो अपने कार्यों द्वारा समाज या विश्व के उत्थान तथा विकास में कोई महत्वपूर्ण योगदान देते हैं। ऐसी महान हस्तियां किसी परिचय की मोहताज नही होती हैं। महान व्यक्तियों को सिर्फ अपने देश में ही नही अपितु पूरे विश्व में सम्मान प्राप्त होता है। महान लोगों द्वारा किये गए कार्यों का सिर्फ भारत ही नहीं सम्पूर्ण विश्व सदैव ऋणी रहेगा। हर व्यक्ति को इनके महान गुणों की जानकारी होनी चाहिए जिससे हम सब लोग उनको प्रेरणादायक और महान मानकर, उनसे शिक्षा प्राप्त करके उनके बताये गए मार्ग का अनुकरण कर सके। इन महान लोगों की प्रतिभा से सम्पूर्ण विश्व परिचित है। ऐसे ही भारत को विकास की ओर ले जाने वाले एक श्रेष्ठ विचारक, महान व्यक्तित्व और कर्मयोध्दा थे डॉ भीमराव अंबेडकर।

महान व्यक्ति वह व्यक्ति होते हैं, जिनका समाज में कोई विशेष योगदान होता है। ऐसी कई महान विभूतियाँ हैं जिन्होंने अपने कार्यों द्वारा ना सिर्फ भारत बल्कि पूरे विश्व world को भी प्रभावित किया है। वे अपने प्रत्येक क्षण को सृजनात्मक तरीके से जीते हैं। महान लोग अपने दृढ़ संकल्प और अपने कार्य के प्रति लगन की वजह से ही महान बनते हैं। भारत के इतिहास में बहुत से लोग महान व्यक्तित्व के स्वामी हैं जिन्होंने अलग-अलग क्षेत्र में अपना विशेष योगदान दिया है। उनके कार्यों की वजह से हम सब उन पर गर्व करते हैं। ऐसे ही एक विलक्षण प्रतिभा के धनी और महान विभूति हैं डॉ भीमराव अंबेडकर। जानते हैं उनके और उनके कार्यों के बारे में। 

जन्म और शिक्षा

 बाबा साहेब डॉ भीमराव आंबेडकर Dr. Bhimrao Ambedkar का जन्म 14 अप्रैल 1891 को ब्रिटिश भारत के मध्यप्रदेश Madhya Pradesh प्रान्त के महू सैन्य छावनी में हुआ था। ये हिन्दू धर्म की महार जाति Mahar caste से थे। उस वक्त इस जाति के साथ काफी भेदभाव किया जाता था। इस कारण इन्हें समाज में बुरी तरह का भेदभाव सहन करना पड़ा था। इसी वजह से इन्हें अपनी प्रारंभिक शिक्षा बहुत ही अपमान के साथ प्राप्त हुई थी लेकिन आज अगर हम देखें तो यह कह सकते हैं कि भीमराव आंबेडकर आजादी से पूर्व के भारत के सबसे शिक्षित व्यक्तिओं में से एक थे। डॉ भीमराव अंबेडकर ने स्नातक की डिग्री बॉम्बे विश्वविद्यालय Bombay University से और कोलंबिया विश्वविद्यालय Columbia University से एमo एo, पीo एचo डीo और एलo एलo डीo की उपाधि हासिल की। इसके अलावा एमo एस सीo और डीo एस सीo की उपाधि भी उन्होंने हासिल की। ये अर्थशास्त्र Economics में डॉक्टरेट करने वाले प्रथम भारतीय थे। डॉ भीमराव आंबेडकर को हर क्षेत्र में महारत हासिल थी। ये दार्शनिक philosopher, लेखक Author, पत्रकार, प्रोफ़ेसर Professor, अर्थशास्त्री, राजनीतिज्ञ politician, शिक्षाविद् educationist, मानवविज्ञानी, विद्वान, न्यायविद् jurist और भी बहुत कुछ थे। 1990 ईo में इन्हे मरणोपरांत देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न Bharat Ratna से सम्मानित किया गया। राजनीतिक समानता political equality  के अलावा सामाजिक समानता social equality को हासिल करने के लिए वह लड़ते रहे। उन्होंने देश की राजनीति में आकर इस क्षेत्र में आजीवन अपना योगदान दिया।

श्रेष्ठ विचारक और महान कर्मयोध्दा के रूप में

डॉ भीमराव अंबेडकर Dr. Bhimrao Ambedkar श्रेष्ठ विचारक ही नहीं, महान कर्मयोध्दा भी थे। उन्होंने वर्ण, जाति, नस्ल, रंग जैसे सभी विभेदकारी तत्वों से मुक्त होने की होने की राह दिखाई। देश में सर्वाधिक शिक्षित व बुद्धिजीवी व्यक्तियों में होते हुए भी इन्हे हिन्दू धर्म Hindu religion की जाति व्यवस्था के कारण समाज में अछूत शब्द का भी सामना करना पड़ा। उन्होंने वर्ण, जाति, नस्ल, रंग जैसे सभी विभेदकारी तत्वों से मुक्त होने की होने की राह दिखाई। जातिवादी मानसिकता casteist mindset को बदलने का उन्होंने बहुत प्रयास किया लेकिन वे सवर्णो की मानसिकता को बदल नहीं पाए पाये। 13 अक्टूबर 1935 को नासिक Nasik में एक सम्मलेन के दौरान अपने धर्म परिवर्तन की घोषणा कर दी। बाबासाहेब Babasaheb के नाम से मशहूर डॉक्टर भीमराव अंबेडकर ने देश में दबे कुचले वर्गों को बराबरी दिलाने, देश में समता मूलक समाज की स्थापना करने और कानूनी तौर पर लोगों को सक्षम बनाने के लिए जीवन भर संघर्ष किया। उन्होंने अपना जीवन दलित वर्ग के उत्थान के लिए समर्पित कर दिया। डॉ भीमराव अंबेडकर ने कहा था : "हमें अपना रास्ता खुद बनाना होगा। राजनीतिक शक्ति शोषितों की समस्याओं का निवारण नहीं हो सकती। उनका उद्धार समाज में उनका उचित स्थान पाने में निहित है"।

संविधान के निर्माता 

अंबेडकर सामाजिक बराबरी के साथ-साथ राष्ट्रीयता, धर्मनिरपेक्षता और सामाजिक न्याय Nationality, Secularism and Social Justice के सिद्धांतों की पैरवी करते रहे। भीमराव अंबेडकर को भारतीय संविधान का जनक father-of-indian-constitution भी कहा जाता है। अंबेडकर ने कहा कि धर्म नहीं बल्कि मानवीयता और सामाजिक बराबरी राष्ट्र की बुनियाद है। डॉ.अंबेडकर Dr.Ambedkar की दृष्टि अत्यंत व्यापक थी। वो कहते थे हर व्यक्ति को अपने उद्देश्य को प्राप्त करने के लिए सर्वश्रेष्ठ कोशिश करनी चाहिए। 1947 में जब देश आजाद हुआ तो हर किसी को यही चिंता थी कि देश अब कैसे आगे बढ़ेगा। देश का ढांचा लोकतांत्रिक democratic बन तो गया था लेकिन यह लोकतंत्र कैसा होगा यह अभी निश्चित नहीं हुआ था। भारत आजाद तो हो गया था लेकिन संविधान Constitution को तैयार करना अभी बाकी था और यह काम इतना आसान भी नहीं था। यह महत्वपूर्ण जिम्मेदारी एक ऐसे व्यक्ति को दी गयी जो एक प्रखर नेता के साथ-साथ समाज सुधारक, कानून और अर्थशास्त्र के भी ज्ञाता थे और वो महान व्यक्ति थे डॉ भीमराव अंबेडकर। 1947 को उन्हें संविधान मसौदा समिति का अध्यक्ष बनाया गया। कठोर परिश्रम और अथक प्रयासों से संविधान बनकर तैयार हुआ। इसके बाद 29 नवंबर 1949 को संविधान सभा constituent Assembly ने इसे मंजूरी दे दी। 

महान व्यक्ति वह व्यक्ति होते हैं, जिनका समाज में कोई विशेष योगदान होता है। ऐसी कई महान विभूतियाँ हैं जिन्होंने अपने कार्यों द्वारा ना सिर्फ भारत बल्कि पूरे विश्व world को भी प्रभावित किया है। वे अपने प्रत्येक क्षण को सृजनात्मक तरीके से जीते हैं। महान लोग अपने दृढ़ संकल्प और अपने कार्य के प्रति लगन की वजह से ही महान बनते हैं। भारत के इतिहास में बहुत से लोग महान व्यक्तित्व के स्वामी हैं जिन्होंने अलग-अलग क्षेत्र में अपना विशेष योगदान दिया है। उनके कार्यों की वजह से हम सब उन पर गर्व करते हैं। ऐसे ही एक विलक्षण प्रतिभा के धनी और महान विभूति हैं डॉ भीमराव अंबेडकर। जानते हैं उनके और उनके कार्यों के बारे में। 

जन्म और शिक्षा

 बाबा साहेब डॉ भीमराव आंबेडकर Dr. Bhimrao Ambedkar का जन्म 14 अप्रैल 1891 को ब्रिटिश भारत के मध्यप्रदेश Madhya Pradesh प्रान्त के महू सैन्य छावनी में हुआ था। ये हिन्दू धर्म की महार जाति Mahar caste से थे। उस वक्त इस जाति के साथ काफी भेदभाव किया जाता था। इस कारण इन्हें समाज में बुरी तरह का भेदभाव सहन करना पड़ा था। इसी वजह से इन्हें अपनी प्रारंभिक शिक्षा बहुत ही अपमान के साथ प्राप्त हुई थी लेकिन आज अगर हम देखें तो यह कह सकते हैं कि भीमराव आंबेडकर आजादी से पूर्व के भारत के सबसे शिक्षित व्यक्तिओं में से एक थे। डॉ भीमराव अंबेडकर ने स्नातक की डिग्री बॉम्बे विश्वविद्यालय Bombay University से और कोलंबिया विश्वविद्यालय Columbia University से एमo एo, पीo एचo डीo और एलo एलo डीo की उपाधि हासिल की। इसके अलावा एमo एस सीo और डीo एस सीo की उपाधि भी उन्होंने हासिल की। ये अर्थशास्त्र Economics में डॉक्टरेट करने वाले प्रथम भारतीय थे। डॉ भीमराव आंबेडकर को हर क्षेत्र में महारत हासिल थी। ये दार्शनिक philosopher, लेखक Author, पत्रकार, प्रोफ़ेसर Professor, अर्थशास्त्री, राजनीतिज्ञ politician, शिक्षाविद् educationist, मानवविज्ञानी, विद्वान, न्यायविद् jurist और भी बहुत कुछ थे। 1990 ईo में इन्हे मरणोपरांत देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न Bharat Ratna से सम्मानित किया गया। राजनीतिक समानता political equality  के अलावा सामाजिक समानता social equality को हासिल करने के लिए वह लड़ते रहे। उन्होंने देश की राजनीति में आकर इस क्षेत्र में आजीवन अपना योगदान दिया।

श्रेष्ठ विचारक और महान कर्मयोध्दा के रूप में

डॉ भीमराव अंबेडकर Dr. Bhimrao Ambedkar श्रेष्ठ विचारक ही नहीं, महान कर्मयोध्दा भी थे। उन्होंने वर्ण, जाति, नस्ल, रंग जैसे सभी विभेदकारी तत्वों से मुक्त होने की होने की राह दिखाई। देश में सर्वाधिक शिक्षित व बुद्धिजीवी व्यक्तियों में होते हुए भी इन्हे हिन्दू धर्म Hindu religion की जाति व्यवस्था के कारण समाज में अछूत शब्द का भी सामना करना पड़ा। उन्होंने वर्ण, जाति, नस्ल, रंग जैसे सभी विभेदकारी तत्वों से मुक्त होने की होने की राह दिखाई। जातिवादी मानसिकता casteist mindset को बदलने का उन्होंने बहुत प्रयास किया लेकिन वे सवर्णो की मानसिकता को बदल नहीं पाए पाये। 13 अक्टूबर 1935 को नासिक Nasik में एक सम्मलेन के दौरान अपने धर्म परिवर्तन की घोषणा कर दी। बाबासाहेब Babasaheb के नाम से मशहूर डॉक्टर भीमराव अंबेडकर ने देश में दबे कुचले वर्गों को बराबरी दिलाने, देश में समता मूलक समाज की स्थापना करने और कानूनी तौर पर लोगों को सक्षम बनाने के लिए जीवन भर संघर्ष किया। उन्होंने अपना जीवन दलित वर्ग के उत्थान के लिए समर्पित कर दिया। डॉ भीमराव अंबेडकर ने कहा था : "हमें अपना रास्ता खुद बनाना होगा। राजनीतिक शक्ति शोषितों की समस्याओं का निवारण नहीं हो सकती। उनका उद्धार समाज में उनका उचित स्थान पाने में निहित है"।

संविधान के निर्माता 

अंबेडकर सामाजिक बराबरी के साथ-साथ राष्ट्रीयता, धर्मनिरपेक्षता और सामाजिक न्याय Nationality, Secularism and Social Justice के सिद्धांतों की पैरवी करते रहे। भीमराव अंबेडकर को भारतीय संविधान का जनक father-of-indian-constitution भी कहा जाता है। अंबेडकर ने कहा कि धर्म नहीं बल्कि मानवीयता और सामाजिक बराबरी राष्ट्र की बुनियाद है। डॉ.अंबेडकर Dr.Ambedkar की दृष्टि अत्यंत व्यापक थी। वो कहते थे हर व्यक्ति को अपने उद्देश्य को प्राप्त करने के लिए सर्वश्रेष्ठ कोशिश करनी चाहिए। 1947 में जब देश आजाद हुआ तो हर किसी को यही चिंता थी कि देश अब कैसे आगे बढ़ेगा। देश का ढांचा लोकतांत्रिक democratic बन तो गया था लेकिन यह लोकतंत्र कैसा होगा यह अभी निश्चित नहीं हुआ था। भारत आजाद तो हो गया था लेकिन संविधान Constitution को तैयार करना अभी बाकी था और यह काम इतना आसान भी नहीं था। यह महत्वपूर्ण जिम्मेदारी एक ऐसे व्यक्ति को दी गयी जो एक प्रखर नेता के साथ-साथ समाज सुधारक, कानून और अर्थशास्त्र के भी ज्ञाता थे और वो महान व्यक्ति थे डॉ भीमराव अंबेडकर। 1947 को उन्हें संविधान मसौदा समिति का अध्यक्ष बनाया गया। कठोर परिश्रम और अथक प्रयासों से संविधान बनकर तैयार हुआ। इसके बाद 29 नवंबर 1949 को संविधान सभा constituent Assembly ने इसे मंजूरी दे दी। 

Republic Day: 73 Eve...
Think Like Mukesh Am...