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Startup Business Model

स्वाद भी लज़ीज़ और कमाई भी मोटी

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स्वाद भी लज़ीज़ और कमाई भी मोटी

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Post Highlights

खाने के स्वाद को लज़ीज़ बनाने के लिए मसाले हर घर में प्रयोग होते हैं। इसलिए इस बिजनेस में कभी भी घाटा नहीं हो सकता कुल मिलाकर हम ये कह सकते हैं कि मसालों का व्यापार बहुत ही मुनाफे वाला व्यापार है। इस बिजनेस को अगर आप मशीन की जगह हाथ से बनाते हो तो फिर इसमें लागत बहुत ही कम लगती है। मसालों की मांग कभी भी कम नहीं होगी इस लिहाज़ से इस बिजनेस में आगे बढ़ने की संभावना अत्यधिक है।

अगर आप नौकरी से परेशान हैं और आपके पास कमाई का कोई साधन नहीं है। आप कम पैसों में ही घर बैठे कोई व्यापार करना चाहते हैं, तो मसालों का व्यापार आपके लिए बेहतर विकल्प होगा। आज वो समय नहीं है जब सिर्फ दो या तीन मसालों में खाना बन जाता था। आजकल खाने में ही इतनी वैरायटी आ गयी है कि हर आइटम में मसाले भी अलग-अलग तरह के डाले जाते हैं। जो कि खाने के स्वाद को भी दो गुना बढ़ा देते हैं। इसलिए अब हर घर में तरह-तरह के मसालों का प्रयोग किया जाता है। बाजार में मसालों की माँग भी काफी ज्यादा है क्योंकि ये हर घर में प्रयोग होता है। चाहे वो उच्च वर्ग हो, मध्यम वर्ग हो या फिर निम्न वर्ग। इसलिए मसालों की मांग को देखते हुए इस व्यवसाय में काफी फायदा है और मुनाफा भी काफी अच्छा मिल जाता है। 

मसालों का इतिहास 

भारत में आज से नहीं कई सालों से मसालों का प्रयोग होता आ रहा है। भारत के मसाले पूरी दुनिया में प्रसिद्ध थे। प्राचीन और मध्य कालीन युग में भी मसालों ने भारत की अर्थव्यवस्था को मजबूत किया था। मसाले मुख्यतः पत्तियों, फूलों, छाल, फलों, जड़ों और बीज आदि से बनाये जाते हैं। कुछ मुख्य मसाले जैसे हल्दी, काली मिर्च, इलायची, तेजपत्ता और दालचीनी आदि हैं। मसाले, दवाईयां, इत्र, सौंदर्य प्रसाधन और अन्य कई उद्योगों में भी प्रयोग किये जाते हैं। भारतीय जलवायु मसालों के लिए उपुक्त है।

आवश्यक सामग्री

अगर आप इस बिजनेस को शुरू करते हैं तो इसमें कुछ आवश्यक सामग्री की जरूरत पड़ेगी जैसे-सूखी मिर्च, हल्दी,साबुत धनिया, जीरा, काली मिर्च, बड़ी इलायची, लौंग इत्यादि। 

मशीन की आवश्यकता 

सबसे पहले इसमें क्लीनर की जरूरत होती है। इस मशीन के द्वारा मसालों में से कंकड़ पत्थर साफ़ किये जाते हैं। उसके बाद क़्वालिटी चैक करने के लिए एक मशीन की आवश्यकता होती है। जब ये प्रक्रिया पूरी हो जाती है उसके बाद मसालों को सुखाने के लिए ड्रायर का इस्तेमाल किया जाता है। जिससे मसाले सही तरह से सूख जाते हैं और अंत में मसाला पीसने के लिए ग्राइंडिंग की जरूरत होती है। ग्राइंडिंग मशीन से मसाला बारीक़ पिस जाता है। आखिर में सीलिंग मशीन से सारे मसाले पैक कर दिए जाते हैं। 

जगह की आवश्यकता और खर्चा 

इस बिजनेस को शुरू करने के लिए सबसे पहले आपके पास मसालों को सुखाने की जगह चाहिए क्योंकि अगर मसाले सूखने के लिए सही से जगह नहीं होगी तो मसाले ख़राब होने की संभावना अधिक रहती है। अगर आप इसे हाथ से बनाते हो तो इसमें खर्चा ज्यादा नहीं लगेगा मगर यदि आप मशीन से मसाले बनाओगे तो मशीन खरीदने के लिए इसमें आपको 50 हजार से 1 लाख तक खर्च करना पड़ सकता है। उसके बाद पैकेजिंग पर भी खर्चा आता है क्योंकि पैकेजिंग का इसमें सबसे महत्वपूर्ण भाग होता है। इसे आप अपने ब्रांड के नाम से भी बेच सकते हैं। 

मसालों की मार्केटिंग 

आप होल-सेल के रूप में मार्केटिंग कर सकते हैं या फिर अलग-अलग दुकानों में बात करके उन्हें भी मसाले बेच सकते हैं। आपको इसमें व्यापर का पंजीकरण कराना पड़ेगा। उसके बाद खाद्य विभाग से लाइसेंस लेना पड़ेगा और अपने ट्रेडमार्क पर आईएसआई लाइसेंस भी लेना होगा। 

अगर आप नौकरी से परेशान हैं और आपके पास कमाई का कोई साधन नहीं है। आप कम पैसों में ही घर बैठे कोई व्यापार करना चाहते हैं, तो मसालों का व्यापार आपके लिए बेहतर विकल्प होगा। आज वो समय नहीं है जब सिर्फ दो या तीन मसालों में खाना बन जाता था। आजकल खाने में ही इतनी वैरायटी आ गयी है कि हर आइटम में मसाले भी अलग-अलग तरह के डाले जाते हैं। जो कि खाने के स्वाद को भी दो गुना बढ़ा देते हैं। इसलिए अब हर घर में तरह-तरह के मसालों का प्रयोग किया जाता है। बाजार में मसालों की माँग भी काफी ज्यादा है क्योंकि ये हर घर में प्रयोग होता है। चाहे वो उच्च वर्ग हो, मध्यम वर्ग हो या फिर निम्न वर्ग। इसलिए मसालों की मांग को देखते हुए इस व्यवसाय में काफी फायदा है और मुनाफा भी काफी अच्छा मिल जाता है। 

मसालों का इतिहास 

भारत में आज से नहीं कई सालों से मसालों का प्रयोग होता आ रहा है। भारत के मसाले पूरी दुनिया में प्रसिद्ध थे। प्राचीन और मध्य कालीन युग में भी मसालों ने भारत की अर्थव्यवस्था को मजबूत किया था। मसाले मुख्यतः पत्तियों, फूलों, छाल, फलों, जड़ों और बीज आदि से बनाये जाते हैं। कुछ मुख्य मसाले जैसे हल्दी, काली मिर्च, इलायची, तेजपत्ता और दालचीनी आदि हैं। मसाले, दवाईयां, इत्र, सौंदर्य प्रसाधन और अन्य कई उद्योगों में भी प्रयोग किये जाते हैं। भारतीय जलवायु मसालों के लिए उपुक्त है।

आवश्यक सामग्री

अगर आप इस बिजनेस को शुरू करते हैं तो इसमें कुछ आवश्यक सामग्री की जरूरत पड़ेगी जैसे-सूखी मिर्च, हल्दी,साबुत धनिया, जीरा, काली मिर्च, बड़ी इलायची, लौंग इत्यादि। 

मशीन की आवश्यकता 

सबसे पहले इसमें क्लीनर की जरूरत होती है। इस मशीन के द्वारा मसालों में से कंकड़ पत्थर साफ़ किये जाते हैं। उसके बाद क़्वालिटी चैक करने के लिए एक मशीन की आवश्यकता होती है। जब ये प्रक्रिया पूरी हो जाती है उसके बाद मसालों को सुखाने के लिए ड्रायर का इस्तेमाल किया जाता है। जिससे मसाले सही तरह से सूख जाते हैं और अंत में मसाला पीसने के लिए ग्राइंडिंग की जरूरत होती है। ग्राइंडिंग मशीन से मसाला बारीक़ पिस जाता है। आखिर में सीलिंग मशीन से सारे मसाले पैक कर दिए जाते हैं। 

जगह की आवश्यकता और खर्चा 

इस बिजनेस को शुरू करने के लिए सबसे पहले आपके पास मसालों को सुखाने की जगह चाहिए क्योंकि अगर मसाले सूखने के लिए सही से जगह नहीं होगी तो मसाले ख़राब होने की संभावना अधिक रहती है। अगर आप इसे हाथ से बनाते हो तो इसमें खर्चा ज्यादा नहीं लगेगा मगर यदि आप मशीन से मसाले बनाओगे तो मशीन खरीदने के लिए इसमें आपको 50 हजार से 1 लाख तक खर्च करना पड़ सकता है। उसके बाद पैकेजिंग पर भी खर्चा आता है क्योंकि पैकेजिंग का इसमें सबसे महत्वपूर्ण भाग होता है। इसे आप अपने ब्रांड के नाम से भी बेच सकते हैं। 

मसालों की मार्केटिंग 

आप होल-सेल के रूप में मार्केटिंग कर सकते हैं या फिर अलग-अलग दुकानों में बात करके उन्हें भी मसाले बेच सकते हैं। आपको इसमें व्यापर का पंजीकरण कराना पड़ेगा। उसके बाद खाद्य विभाग से लाइसेंस लेना पड़ेगा और अपने ट्रेडमार्क पर आईएसआई लाइसेंस भी लेना होगा। 

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