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अब खेती से नहीं हवा से बनेगी रोटी

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अब खेती से नहीं हवा से बनेगी रोटी

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Post Highlights

अब किसी को भी खेती करने के लिए जमीन की जरूरत नहीं पड़ेगी। चीनी रिसर्चर्स का दावा है कि खेती के लिए नहीं होगी अब जमीन की जरूरत। चीनी वैज्ञानिकों ने कहा है कि अब हवा के जरिए रोटी बना सकते हैं। अगर ये संभव होता है तो ये एक क्रांतिकारी परिवर्तन होगा। उन्होंने कार्बन डाइऑक्साइड के जरिये स्टार्च का संश्लेषण (Synthesis) किया है। सिर्फ कार्बन डाइऑक्साइड का उपयोग कर औद्योगिक तरीके से भोजन बनाया जा सकेगा जिससे कार्बन डाइऑक्साइड के जरिये स्टार्च का संश्लेषण (Synthesis) किया है। भोजन की कभी भी कमी नहीं रहेगी और हम इंसानों का रहने का वातावरण भी कई गुना अच्छा हो जाएगा।

ये सुनने में थोड़ा अजीब लग सकता है कि अब खेती के लिए जमीन की जरूरत नहीं पड़ेगी क्योंकि वैज्ञानिक हवा से रोटी बनाएंगे और वैज्ञानिकों ने ये दावा किया है। इसलिए अब ये मुमकिन हो सकता है। दुनिया में पहली बार कार्बन डाइऑक्साइड के जरिये स्टार्च का संश्लेषण (Synthesis) किया है, थिएनचिन इंस्टीट्यूट ऑफ इंडस्ट्रियल बायोलॉजी की एक रिसर्च टीम ने। अब वैज्ञानिक दावा कर रहे हैं कि कार्बन डाइऑक्साइड का उपयोग कर औद्योगिक तरीके से भोजन का उत्पादन किया जा सकेगा इसलिए अब खेती करने की जरुरत नहीं पड़ेगी। चीन का यह दावा अगर सच होता है तो ये किसी पुरस्कार से कम नहीं है।

वैज्ञानिकों का कहना है कि अगर हम 3 क्यूबिक मीटर रिएक्टर का सालाना स्टार्च उत्पादन करते हैं तो वो 1 हेक्टेयर मक्के के खेत के बराबर होगा। अगर सच में औद्योगिक उत्पादन को मुमकिन किया जा सकता है, तो कभी भी खाने के लिए कोई तरसेगा नहीं। सोचिये अगर ऐसा हुआ तो कितनी आसान हो जायेगी ज़िन्दगी क्योंकि खाने की कोई कमी नहीं रहेगी। पूरी दुनिया में कई लोगों के लिए एक वक्त का भोजन भी नसीब नहीं होता है। पर चीनी वैज्ञानिकों ने कार्बन डाइऑक्साइड से स्टार्च बनाने का दावा किया है।

दरअसल हम हर साल अरबों टन कार्बन डाइऑक्साइड का उत्सर्जन करते हैं और इस कारण ग्रीनहाउस गैसों के प्रभाव से पूरे विश्व को परेशानी हो रही है। अगर कार्बन डाइऑक्साइड को स्टार्च में बदल दिया जाता है, तो इससे कई समस्याओं को काफी कम किया जा सकता है। वास्तव में, स्टार्च सिर्फ एक प्रकार का भोजन नहीं, बल्कि एक उच्च आणविक कार्बोहाइड्रेट भी है।

हमे खाद्य उत्पादन के लिए जमीन चाहिए होती है और वो भी बहुत बड़े क्षेत्र में। इस कारण से ताजे जल संसाधनों, कीटनाशकों और उर्वरकों की खपत भी बहुत भारी मात्रा में होती है। चीन और भारत जैसे देशों में जहाँ की जनसंख्या अधिक है। यहाँ पर खेती करने के लिए जमीन की भी एक बहुत बड़ी समस्या है साथ-साथ खाद्य सुरक्षा की भी। अब इस समस्या का समाधान मिल चुका है। 

आज चीन के वैज्ञानिकों की हर जगह वाहवाही हो रही है। चीन के वैज्ञानिकों ने अमेरिकी वैज्ञानिकों से पहले इसके बारे में रिसर्च कर लिया था। अमेरिका ने सिर्फ कार्बन डाइऑक्साइड के साथ ग्लूकोज़ को संश्लेषण करने की तैयारी की लेकिन चीनी वैज्ञानिकों ने कार्बन डाइऑक्साइड सिंथेटिक स्टार्च के बारे में जानकारी दी। उन्होंने स्टार्च के नियंत्रणीय संश्लेषण, प्राकृतिक प्रकाश संश्लेषण प्रक्रिया के बारे में जाना। ये जानकारी जैव-विनिर्माण उद्योग के विकास के लिए भी अच्छी साबित हो सकती है।

चीनी वैज्ञानिकों का कहना है कि इससे हमे कृषि के लिए खेती की जरूरत भी नहीं पड़ेगी। जमीन का वह भाग जिस पर खेती करते थे उसको पूरा का पूरा घास के मैदान में बदल देंगे। पूरे खेत घास के मैदान खूबसूरत जंगल में बदल जायेंगे इससे वातावरण स्वच्छ होगा और ग्रीनहाउस गैसों के प्रभाव को भी कम किया जा सकेगा। तब शायद इंसान ढंग से साँस ले पायेगा। आज भी लोग भुखमरी का सामना कर रहे हैं। पूरी दुनिया में लगभग 100 मिलियन से अधिक लोगों के पास खाने को भोजन नहीं है, पर सिंथेटिक स्टार्च की नयी खोज से लोगों के जीवन में अंतर आयेगा और इस तरह कृषि योग्य भूमि को भी बचाया जा सकेगा। भविष्य में कारखानों में ही स्टार्च का उत्पादन किया जा सकेगा।

ये सुनने में थोड़ा अजीब लग सकता है कि अब खेती के लिए जमीन की जरूरत नहीं पड़ेगी क्योंकि वैज्ञानिक हवा से रोटी बनाएंगे और वैज्ञानिकों ने ये दावा किया है। इसलिए अब ये मुमकिन हो सकता है। दुनिया में पहली बार कार्बन डाइऑक्साइड के जरिये स्टार्च का संश्लेषण (Synthesis) किया है, थिएनचिन इंस्टीट्यूट ऑफ इंडस्ट्रियल बायोलॉजी की एक रिसर्च टीम ने। अब वैज्ञानिक दावा कर रहे हैं कि कार्बन डाइऑक्साइड का उपयोग कर औद्योगिक तरीके से भोजन का उत्पादन किया जा सकेगा इसलिए अब खेती करने की जरुरत नहीं पड़ेगी। चीन का यह दावा अगर सच होता है तो ये किसी पुरस्कार से कम नहीं है।

वैज्ञानिकों का कहना है कि अगर हम 3 क्यूबिक मीटर रिएक्टर का सालाना स्टार्च उत्पादन करते हैं तो वो 1 हेक्टेयर मक्के के खेत के बराबर होगा। अगर सच में औद्योगिक उत्पादन को मुमकिन किया जा सकता है, तो कभी भी खाने के लिए कोई तरसेगा नहीं। सोचिये अगर ऐसा हुआ तो कितनी आसान हो जायेगी ज़िन्दगी क्योंकि खाने की कोई कमी नहीं रहेगी। पूरी दुनिया में कई लोगों के लिए एक वक्त का भोजन भी नसीब नहीं होता है। पर चीनी वैज्ञानिकों ने कार्बन डाइऑक्साइड से स्टार्च बनाने का दावा किया है।

दरअसल हम हर साल अरबों टन कार्बन डाइऑक्साइड का उत्सर्जन करते हैं और इस कारण ग्रीनहाउस गैसों के प्रभाव से पूरे विश्व को परेशानी हो रही है। अगर कार्बन डाइऑक्साइड को स्टार्च में बदल दिया जाता है, तो इससे कई समस्याओं को काफी कम किया जा सकता है। वास्तव में, स्टार्च सिर्फ एक प्रकार का भोजन नहीं, बल्कि एक उच्च आणविक कार्बोहाइड्रेट भी है।

हमे खाद्य उत्पादन के लिए जमीन चाहिए होती है और वो भी बहुत बड़े क्षेत्र में। इस कारण से ताजे जल संसाधनों, कीटनाशकों और उर्वरकों की खपत भी बहुत भारी मात्रा में होती है। चीन और भारत जैसे देशों में जहाँ की जनसंख्या अधिक है। यहाँ पर खेती करने के लिए जमीन की भी एक बहुत बड़ी समस्या है साथ-साथ खाद्य सुरक्षा की भी। अब इस समस्या का समाधान मिल चुका है। 

आज चीन के वैज्ञानिकों की हर जगह वाहवाही हो रही है। चीन के वैज्ञानिकों ने अमेरिकी वैज्ञानिकों से पहले इसके बारे में रिसर्च कर लिया था। अमेरिका ने सिर्फ कार्बन डाइऑक्साइड के साथ ग्लूकोज़ को संश्लेषण करने की तैयारी की लेकिन चीनी वैज्ञानिकों ने कार्बन डाइऑक्साइड सिंथेटिक स्टार्च के बारे में जानकारी दी। उन्होंने स्टार्च के नियंत्रणीय संश्लेषण, प्राकृतिक प्रकाश संश्लेषण प्रक्रिया के बारे में जाना। ये जानकारी जैव-विनिर्माण उद्योग के विकास के लिए भी अच्छी साबित हो सकती है।

चीनी वैज्ञानिकों का कहना है कि इससे हमे कृषि के लिए खेती की जरूरत भी नहीं पड़ेगी। जमीन का वह भाग जिस पर खेती करते थे उसको पूरा का पूरा घास के मैदान में बदल देंगे। पूरे खेत घास के मैदान खूबसूरत जंगल में बदल जायेंगे इससे वातावरण स्वच्छ होगा और ग्रीनहाउस गैसों के प्रभाव को भी कम किया जा सकेगा। तब शायद इंसान ढंग से साँस ले पायेगा। आज भी लोग भुखमरी का सामना कर रहे हैं। पूरी दुनिया में लगभग 100 मिलियन से अधिक लोगों के पास खाने को भोजन नहीं है, पर सिंथेटिक स्टार्च की नयी खोज से लोगों के जीवन में अंतर आयेगा और इस तरह कृषि योग्य भूमि को भी बचाया जा सकेगा। भविष्य में कारखानों में ही स्टार्च का उत्पादन किया जा सकेगा।

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