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Success Motivation

मटिल्डा कुल्लू- आशाओं की आशा – फोर्ब्स इंडिया वुमन पावर लिस्ट 2021

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मटिल्डा कुल्लू- आशाओं की आशा – फोर्ब्स इंडिया वुमन पावर लिस्ट 2021

Post Highlights

अपनी टूटी- फूटी, मामूली साइकिल से ओडिशा के सुंदरगढ़ जिले के छोटे से गांव से अपना सफर तय करते हुए, फोर्ब्स इंडिया की "वुमन पावर लिस्ट 2021" की सूची में तीसरे नंबर पर सूचीबद्ध होने तक का, एक लम्बा सफर तय करते हुए एक महान मुकाम हासिल करने वाली, साधारण सी 45 वर्षीय आशा कार्यकर्ता मटिल्डा कुल्लू ने अपना और देश का नाम पूरी दुनियां में रौशन कर दिया।

एक कहावत है "जहां चाह है वहां राह है " ये कहावत सुनने में जितनी साधारण लगती है इसे असल में साबित करना उतना ही मुश्किल काम है। चाहतें सबकी होती हैं पर उन चाहतों को हकीकत के धरातल पर ले आना सबके बस की बात नहीं होती। अपने खुद के लिए तरक्की की चाह रखना, परिवार के लिए बेहतर भविष्य के लिए संघर्ष, तो सभी करते हैं पर "अपने लिए जिए तो क्या जिए, तू जी ऐ दिल ज़माने के लिए" इन लाइनों को चरितार्थ करने के लिए बहुत बड़ा दिल और हिम्मत चाहिए। और ऎसी ही हिम्मत और जज़्बे को दिल में संजोए अपनी टूटी- फूटी, पुरानी साइकिल से ओडिशा Odisha के सुंदरगढ़ जिले Sundergarh district के गरगदबहल Garagadbahal गांव से अपना सफर तय करते हुए फोर्ब्स इंडिया के वुमन पावर लिस्ट 2021 की सूची Forbes India Women Power list 2021 में तीसरे नंबर पर सूचीबद्ध होने तक का, एक लम्बा और महान मुकाम हासिल करने वाली एक मामूली 45 वर्षीय आशा कार्यकर्ता मटिल्डा कुल्लू Matilda Kullu ने अपना और देश का नाम पूरी दुनियां में रौशन कर दिया।

कुल्लू, को स्टेट बैंक की पूर्व चीफ अरुंधति भट्टाचार्य, Former State Bank chief Arundhati Bhattacharya, महिला हॉकी टीम की कप्तान women's hockey team captain रानी रामपाल Rani Rampal, फिल्म अभिनेत्री रसिका दुग्गल film actress Rasika Duggal,पैरा एथलीट अवनि लेखरा para athlete Avni Lekhara, पर्यावरण कार्यकर्ता दिशा रवि environmental activist Disha Ravi, अमेजन प्राइम वीडियो की हेड ऑफ ऑरिजनल अपर्णा पुरोहित Amazon Prime Video head of original Aparna Purohit, और भाविना पटेल Bhavina Patel के साथ  'फोर्ब्स इंडिया डब्ल्यू-पावर 2021' सूची में शामिल किया गया है। यह पहली बार है जब किसी आशा कार्यकर्ता Accredited Social Health Activist (ASHA)को सूची में शामिल किया गया है। कुल्लू, पिछले 15 वर्षों से आशा कार्यकर्ता हैं। 

हालांकि उनका यह सफर इतना आसान नहीं था, उन्हें इस शिखर तक पहुंचने के लिए अपनी राह में आने वाली जातिवाद, रूपी बड़ी दुर्गम चट्टानों को तोड़ते हुए, अंधविश्वास रूपी कटीली झाड़ियों को काटते-छांटते, अपनी भूख और प्यास को सहते हुए चढ़ना पड़ा। उनकी ज़िन्दगी में कई ऐसे दिन भी थे जब उन्हें भूखे पेट ही सोना पड़ा था। कुल्लू खारिया जनजाति से ताल्लुक रखती हैं। आशा कार्यकर्ता होने से पहले कुल्लू सिलाई की दुकान चलाती थीं। उनके अपने गांव में एक स्वयं सहायता समूह self help group चलता था जिसके संपर्क में आने के बाद उन्हें आशा के कार्यों के बारे में पता चला और इस तरह वो एक आशा कार्यकर्ता की भूमिका में आयीं। उनके माता पिता के पांच बच्चों में वो सबसे छोटी थी। फोर्ब्स की भारत की शक्तिशाली महिलाओं की सूची में जगह बनाते हुए, कुल्लू ने एक लंबा सफर तय किया है। कुल्लू ने ग्रामीणों को अच्छी चिकित्सा स्वास्थ्य देखभाल के महत्व को समझने में मदद की। उन्होंने ग्रामीणों को, जो ज्यादातर आदिवासी हैं, अस्पतालों तक जाने और डॉक्टरों से मिलने के लिए राजी किया। बीमारों के लिए उचित चिकित्सा मार्ग सुनिश्चित करवाने के अलावा, उन्होंने अपने घर-घर के दौरे के दौरान जातिवाद और अस्पृश्यता Casteism and Untouchability से भी लड़ाई लड़ी क्योंकि वह अनुसूचित जनजाति scheduled tribe से हैं। छोटी जाति में पैदा होने के कारण उन्हें बहुत बार अपमान झेलना पड़ता था। ऐसे ही अपने अनुभव का जिक्र करते हुए वो कहती हैं "“कभी-कभी लोगों को लगता था कि उनके बीमार होने का कारण मैं हूँ क्योंकि मैं उनके घर गई थी, उनके अंधविश्वासों की हद ऐसी थी। अपने क्षेत्र के दौरे के दौरान, लोग कभी-कभी उन्हें गिलास में पानी देते थे पर बाद में वे उस गिलास को छूने से मना कर देते थे। ये सारा अपमान और तिरस्कार उनके मनोबल को कमजोर नहीं कर सका बल्कि इसके उलट उनकी प्रतिबद्धता और मज़बूत होती गई। वो बचपन से देखती थी कि ग्रामीणों को काले जादू black magic पर ज्यादा भरोसा था वो बीमार होने पर इलाज से ज्याद झाड़-फूँक कराना पसंद करते थे कुल्लू का संकल्प उन्हें इन अंधविश्वासों से निकाल कर और उचित चिकित्सा मार्ग proper medical treatment अपनाने के लिए शिक्षित करना था। आशा कार्यकर्ता के रूप में उनका काम गर्भवती और नई माताओं pregnant and new mothers की जाँच, मलेरिया के लिए परीक्षण test for malaria, महिलाओं को स्वच्छता और गर्भनिरोधक hygiene and contraception पर सलाह देना, आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं के साथ बैठकें करना और कोविड के लक्षणों और टीकों के लिए घरों का दौरा करना था। वो अपने पुराने अनुभव में बताती है जब वो एक क्षेत्र के दौरे पर थी,  एक महिला ने जिसकी बहू मलेरिया से पीड़ित थी ने कुल्लू पर चिल्लाते हुए कहा - "आपकी जाति के लोग अपने बारे में क्या सोचते हैं"। हालांकि, कुल्लू का कहना है कि वह मलेरिया से पीड़ित महिला के घर लगातार जाती रही, क्योंकि उसकी देखभाल करना उसका फ़र्ज़ था। बरसों बाद जब उनकी बहू को बच्चा हुआ तो उसी महिला ने कुल्लू से कहा- ''अगर तुम न होती तो हम उसे संभाल नहीं पाते।'' कुल्लू के लिए वो क्षण बहुत सुखद था। उनके इन्ही निःस्वार्थ प्रयासों से वो लोगों की मानसिकता बदल सकी और अब वो गर्व से कहती हैं  "अब जब मैं जाती हूं तो वे मेरे साथ बैठकर खाते हैं और चाय भी पीते हैं।"

सुंदरगढ़ जिले के बड़ागांव के गरगड़बहल गांव में वो पिछले 15 साल से काम कर रही हैं। इस 45 वर्षीय महिला कुल्लू का नाम अब देश की सबसे मजबूत महिला हस्तियों में शामिल हो गया है। एक आशा कार्यकर्ता के रूप में काम करते हुए, कुल्लू ने गांव गर्गड़बहल के लोगों के लिए स्वास्थ्य सेवा प्रणाली healthcare system को करीब लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उनके उल्लेखनीय पराक्रम के लिए देश के विभिन्न हिस्सों से प्रशंसा मिली है। कुल्लू गांव की COVID-19 योद्धा COVID-19 Warriors है। महामारी के दौरान कुल्लू की नौकरी और भी महत्वपूर्ण हो गई। COVID-19 के दौरान, लॉक डाउन में वो रोजाना 50-60 घरों में जाकर टेस्ट करती थीं। उनके क्षेत्र में लगभग पूरी तरह से कोविड के खिलाफ टीका लगाया लगाया जा चुका है। हिंदुस्तान टाइम्स Hindustan Times के अनुसार, कुल्लू ने प्रतिदिन 50-60 से अधिक घरों का दौरा किया ताकि स्थानीय लोगों को वायरस से संक्रमित होने का संदेह न रहे। उनके पास गांव के 250 घरों की जिम्मेदारी हैं। इस आशा कार्यकर्ता ने बड़ागांव तहसील में 964 लोगों की देखभाल के लिए अपना जीवन समर्पित कर दिया है। कुल्लू की आशा कार्यकर्ता के रूप में सिर्फ 4,500 रुपये प्रति माह की कमाई के बावजूद स्वास्थ्य के क्षेत्र में किया गया उनका काम अविस्मरणीय है। क्यूंकि उन्होंने पैसों के लिए नहीं बल्कि लोगों को बेहतर जीवन देने के लिए कार्य किया। अपने इसी समर्पण और सेवा भाव से आज वो देश की सारी आशाओं, स्वस्थ्य कार्यकर्ताओं health workers और आम जनों के लिए भी के लिए एक आशा की किरण और प्रेरणा स्रोत बन कर उभरी हैं। ओडिशा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक Chief Minister Naveen Patnaik ने उनके समर्पण और उपलब्धि के लिए आशा कार्यकर्ता को बधाई दी। उन्होंने अपने एक ट्वीट में लिखा, 'मैं सुंदरगढ़ जिले की बड़गांव तहसील की आशा कार्यकर्ता मतिल्दा कुल्लू को फोर्ब्स इंडिया डब्ल्यू-पावर 2021 सूची में नामित होने पर बधाई देता हूं, वो हजारों समर्पित कोविड योद्धाओं का प्रतिनिधित्व करती हैं, जो लोगों को बचाने के लिए खड़े रहे हैं।''

मदर टेरेसा Mother Teresa ने कहा है “मैं अकेले दुनिया को नहीं बदल सकती, लेकिन मैं कई लहरें पैदा करने के लिए पानी में एक पत्थर तो डाल ही सकती हूं।” मटिल्डा कुल्लू एक ऐसी ही मिसाल बन कर आज पूरी दुनिया को प्रेरित करने वाली शख्सियत बन गई है। बेशक यहाँ तक का रास्ता उन्होंने अकेले ही तय किया पर अब वे अकेली नहीं है उनकी पहुंच आज सुंदरगढ़ जिले के बड़ागांव की सीमाओं को लांघती हुई दुनियां के कोने-कोने तक हो गई है।

एक कहावत है "जहां चाह है वहां राह है " ये कहावत सुनने में जितनी साधारण लगती है इसे असल में साबित करना उतना ही मुश्किल काम है। चाहतें सबकी होती हैं पर उन चाहतों को हकीकत के धरातल पर ले आना सबके बस की बात नहीं होती। अपने खुद के लिए तरक्की की चाह रखना, परिवार के लिए बेहतर भविष्य के लिए संघर्ष, तो सभी करते हैं पर "अपने लिए जिए तो क्या जिए, तू जी ऐ दिल ज़माने के लिए" इन लाइनों को चरितार्थ करने के लिए बहुत बड़ा दिल और हिम्मत चाहिए। और ऎसी ही हिम्मत और जज़्बे को दिल में संजोए अपनी टूटी- फूटी, पुरानी साइकिल से ओडिशा Odisha के सुंदरगढ़ जिले Sundergarh district के गरगदबहल Garagadbahal गांव से अपना सफर तय करते हुए फोर्ब्स इंडिया के वुमन पावर लिस्ट 2021 की सूची Forbes India Women Power list 2021 में तीसरे नंबर पर सूचीबद्ध होने तक का, एक लम्बा और महान मुकाम हासिल करने वाली एक मामूली 45 वर्षीय आशा कार्यकर्ता मटिल्डा कुल्लू Matilda Kullu ने अपना और देश का नाम पूरी दुनियां में रौशन कर दिया।

कुल्लू, को स्टेट बैंक की पूर्व चीफ अरुंधति भट्टाचार्य, Former State Bank chief Arundhati Bhattacharya, महिला हॉकी टीम की कप्तान women's hockey team captain रानी रामपाल Rani Rampal, फिल्म अभिनेत्री रसिका दुग्गल film actress Rasika Duggal,पैरा एथलीट अवनि लेखरा para athlete Avni Lekhara, पर्यावरण कार्यकर्ता दिशा रवि environmental activist Disha Ravi, अमेजन प्राइम वीडियो की हेड ऑफ ऑरिजनल अपर्णा पुरोहित Amazon Prime Video head of original Aparna Purohit, और भाविना पटेल Bhavina Patel के साथ  'फोर्ब्स इंडिया डब्ल्यू-पावर 2021' सूची में शामिल किया गया है। यह पहली बार है जब किसी आशा कार्यकर्ता Accredited Social Health Activist (ASHA)को सूची में शामिल किया गया है। कुल्लू, पिछले 15 वर्षों से आशा कार्यकर्ता हैं। 

हालांकि उनका यह सफर इतना आसान नहीं था, उन्हें इस शिखर तक पहुंचने के लिए अपनी राह में आने वाली जातिवाद, रूपी बड़ी दुर्गम चट्टानों को तोड़ते हुए, अंधविश्वास रूपी कटीली झाड़ियों को काटते-छांटते, अपनी भूख और प्यास को सहते हुए चढ़ना पड़ा। उनकी ज़िन्दगी में कई ऐसे दिन भी थे जब उन्हें भूखे पेट ही सोना पड़ा था। कुल्लू खारिया जनजाति से ताल्लुक रखती हैं। आशा कार्यकर्ता होने से पहले कुल्लू सिलाई की दुकान चलाती थीं। उनके अपने गांव में एक स्वयं सहायता समूह self help group चलता था जिसके संपर्क में आने के बाद उन्हें आशा के कार्यों के बारे में पता चला और इस तरह वो एक आशा कार्यकर्ता की भूमिका में आयीं। उनके माता पिता के पांच बच्चों में वो सबसे छोटी थी। फोर्ब्स की भारत की शक्तिशाली महिलाओं की सूची में जगह बनाते हुए, कुल्लू ने एक लंबा सफर तय किया है। कुल्लू ने ग्रामीणों को अच्छी चिकित्सा स्वास्थ्य देखभाल के महत्व को समझने में मदद की। उन्होंने ग्रामीणों को, जो ज्यादातर आदिवासी हैं, अस्पतालों तक जाने और डॉक्टरों से मिलने के लिए राजी किया। बीमारों के लिए उचित चिकित्सा मार्ग सुनिश्चित करवाने के अलावा, उन्होंने अपने घर-घर के दौरे के दौरान जातिवाद और अस्पृश्यता Casteism and Untouchability से भी लड़ाई लड़ी क्योंकि वह अनुसूचित जनजाति scheduled tribe से हैं। छोटी जाति में पैदा होने के कारण उन्हें बहुत बार अपमान झेलना पड़ता था। ऐसे ही अपने अनुभव का जिक्र करते हुए वो कहती हैं "“कभी-कभी लोगों को लगता था कि उनके बीमार होने का कारण मैं हूँ क्योंकि मैं उनके घर गई थी, उनके अंधविश्वासों की हद ऐसी थी। अपने क्षेत्र के दौरे के दौरान, लोग कभी-कभी उन्हें गिलास में पानी देते थे पर बाद में वे उस गिलास को छूने से मना कर देते थे। ये सारा अपमान और तिरस्कार उनके मनोबल को कमजोर नहीं कर सका बल्कि इसके उलट उनकी प्रतिबद्धता और मज़बूत होती गई। वो बचपन से देखती थी कि ग्रामीणों को काले जादू black magic पर ज्यादा भरोसा था वो बीमार होने पर इलाज से ज्याद झाड़-फूँक कराना पसंद करते थे कुल्लू का संकल्प उन्हें इन अंधविश्वासों से निकाल कर और उचित चिकित्सा मार्ग proper medical treatment अपनाने के लिए शिक्षित करना था। आशा कार्यकर्ता के रूप में उनका काम गर्भवती और नई माताओं pregnant and new mothers की जाँच, मलेरिया के लिए परीक्षण test for malaria, महिलाओं को स्वच्छता और गर्भनिरोधक hygiene and contraception पर सलाह देना, आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं के साथ बैठकें करना और कोविड के लक्षणों और टीकों के लिए घरों का दौरा करना था। वो अपने पुराने अनुभव में बताती है जब वो एक क्षेत्र के दौरे पर थी,  एक महिला ने जिसकी बहू मलेरिया से पीड़ित थी ने कुल्लू पर चिल्लाते हुए कहा - "आपकी जाति के लोग अपने बारे में क्या सोचते हैं"। हालांकि, कुल्लू का कहना है कि वह मलेरिया से पीड़ित महिला के घर लगातार जाती रही, क्योंकि उसकी देखभाल करना उसका फ़र्ज़ था। बरसों बाद जब उनकी बहू को बच्चा हुआ तो उसी महिला ने कुल्लू से कहा- ''अगर तुम न होती तो हम उसे संभाल नहीं पाते।'' कुल्लू के लिए वो क्षण बहुत सुखद था। उनके इन्ही निःस्वार्थ प्रयासों से वो लोगों की मानसिकता बदल सकी और अब वो गर्व से कहती हैं  "अब जब मैं जाती हूं तो वे मेरे साथ बैठकर खाते हैं और चाय भी पीते हैं।"

सुंदरगढ़ जिले के बड़ागांव के गरगड़बहल गांव में वो पिछले 15 साल से काम कर रही हैं। इस 45 वर्षीय महिला कुल्लू का नाम अब देश की सबसे मजबूत महिला हस्तियों में शामिल हो गया है। एक आशा कार्यकर्ता के रूप में काम करते हुए, कुल्लू ने गांव गर्गड़बहल के लोगों के लिए स्वास्थ्य सेवा प्रणाली healthcare system को करीब लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उनके उल्लेखनीय पराक्रम के लिए देश के विभिन्न हिस्सों से प्रशंसा मिली है। कुल्लू गांव की COVID-19 योद्धा COVID-19 Warriors है। महामारी के दौरान कुल्लू की नौकरी और भी महत्वपूर्ण हो गई। COVID-19 के दौरान, लॉक डाउन में वो रोजाना 50-60 घरों में जाकर टेस्ट करती थीं। उनके क्षेत्र में लगभग पूरी तरह से कोविड के खिलाफ टीका लगाया लगाया जा चुका है। हिंदुस्तान टाइम्स Hindustan Times के अनुसार, कुल्लू ने प्रतिदिन 50-60 से अधिक घरों का दौरा किया ताकि स्थानीय लोगों को वायरस से संक्रमित होने का संदेह न रहे। उनके पास गांव के 250 घरों की जिम्मेदारी हैं। इस आशा कार्यकर्ता ने बड़ागांव तहसील में 964 लोगों की देखभाल के लिए अपना जीवन समर्पित कर दिया है। कुल्लू की आशा कार्यकर्ता के रूप में सिर्फ 4,500 रुपये प्रति माह की कमाई के बावजूद स्वास्थ्य के क्षेत्र में किया गया उनका काम अविस्मरणीय है। क्यूंकि उन्होंने पैसों के लिए नहीं बल्कि लोगों को बेहतर जीवन देने के लिए कार्य किया। अपने इसी समर्पण और सेवा भाव से आज वो देश की सारी आशाओं, स्वस्थ्य कार्यकर्ताओं health workers और आम जनों के लिए भी के लिए एक आशा की किरण और प्रेरणा स्रोत बन कर उभरी हैं। ओडिशा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक Chief Minister Naveen Patnaik ने उनके समर्पण और उपलब्धि के लिए आशा कार्यकर्ता को बधाई दी। उन्होंने अपने एक ट्वीट में लिखा, 'मैं सुंदरगढ़ जिले की बड़गांव तहसील की आशा कार्यकर्ता मतिल्दा कुल्लू को फोर्ब्स इंडिया डब्ल्यू-पावर 2021 सूची में नामित होने पर बधाई देता हूं, वो हजारों समर्पित कोविड योद्धाओं का प्रतिनिधित्व करती हैं, जो लोगों को बचाने के लिए खड़े रहे हैं।''

मदर टेरेसा Mother Teresa ने कहा है “मैं अकेले दुनिया को नहीं बदल सकती, लेकिन मैं कई लहरें पैदा करने के लिए पानी में एक पत्थर तो डाल ही सकती हूं।” मटिल्डा कुल्लू एक ऐसी ही मिसाल बन कर आज पूरी दुनिया को प्रेरित करने वाली शख्सियत बन गई है। बेशक यहाँ तक का रास्ता उन्होंने अकेले ही तय किया पर अब वे अकेली नहीं है उनकी पहुंच आज सुंदरगढ़ जिले के बड़ागांव की सीमाओं को लांघती हुई दुनियां के कोने-कोने तक हो गई है।

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